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जब सेकेंड के सौवें हिस्से से 1984 ओलंपिक ब्रॉन्ज से चूकी थीं PT ऊषा, देखें वीडियो

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 21st, 2017 12:48 IST

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। पीटी ऊषा को कौन नहीं जानता, Pilavullakandi Thekkeparambil Usha यानि पीटी ऊषा भारत की सर्वश्रेष्ठ एथलीट्स में गिनी जाती हैं। इसलिए उनको भारतीय फिल्ड एंड ट्रैक की रानी भी कहा जाता है। पीटी ऊषा राष्ट्रीय के साथ साथ ढेरों अन्तराष्ट्रीय मैडल अपने नाम किए हैं। चूंकि वो केरल के पय्योली क्षेत्र से थी तो उन्हें "पय्योली एक्स्प्रेस" भी कहा जाता है।

1983 में एशियन चैंपियनशिप में उन्होनें 400 मीटर में गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया था, यही वजह रही कि 1984 में होने वाले ओलंपिक में उनसे काफी उम्मीदें जुड़ गई थी। लेकिन ओलंपिक सेमीफाइनल में पहले स्थान पर रही ऊषा फाईनल में बॉंज मैडल से भी हार गयी, लेकिन ये मैच लोगों के लिए काफी रोमांचक रहा। क्योंकि पहले और दूसरे स्थान पर विजेता का फैसला साफ था क्योंकि वो एक बड़े अंतर से जीती थी लेकिन इसके बाद भी भारतीय दर्शकों की निगाहें सिर्फ ब्रॉंज के फैसले पर टिकी थी। और उसमें तीन प्रतिभागी एक साथ फीनिश लाईन पर पहुंची थी।

इस रेस में ऊषा पांच नंबर लाइन में दौड़ती दिखाई दे रहीं हैं, इस वीडियो में जीत के लिए पीटी ऊषा का संघर्ष साफ देखा जा सकता है।

सेकेंड के सौंवे हिस्से से गंवाया मेडल

इस हर्डल रेस से भारतीयों की काफी उम्मीदें थी लेकिन फाइनल में पीटी अपनी प्रतियागी से 1/100 यानि सेकेंड के भी सौंवे हिस्से से ओलंपिक में भारत का नाम करने से चूक गयी थी। हालांकि इस हर्डल रेस में उन्होंने 55.42 सेकेंड में 400 मीटर की हर्डल पूरे करने का एशियन रिकॉर्ड अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने भारतीय नागरिकों को ढेरों गर्व के क्षण दिए हैं, कई चैंपियन शिप अपने नाम की हैं लेकिन ये जांबाज कभी ओलंपिक में भारत को मैडल से नहीं नवाज पायी। इसके बाद उन्होनें 1988 में हए ओलंपिक में हिस्सा लिया लेकिन इसमें भी उनका जादू नहीं चल पाया और वो सांतवे स्थान पर रहीं।

पीटी ऊषा ने अपने लाइफ टाइम करियर में 3 बार हिस्सा लिया है, लेकिन उसमें वो भारत को जीत नहीं दिला पाई, लेकिन फिर भी पीटी ने 1980 से लेकर 1998 तक एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप में ढेरों मैडल भारत के नाम किए।े

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अवॉर्ड्स की लंबी कतार

पीटी ऊषा को 1984 में खेल के सर्वक्षेष्ठ अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया

1984 में ही उन्हें पद्मश्री प्राप्त हुआ

बेस्ट एथलीट इन इंडिया से उन्हें1984, 1985, 1986, 1987 और 189 में पांच बार नवाजा गया

1985 जाकटा एशियन एथलीट मीट में ग्रेट वुमन एथलीट अवॉर्ड उन्हें मिला

इसके साथ ही 1985 और 1986 वर्ल्ड ट्रॉफी फॉर बेस्ट एथलीट और 1986 में ही उन्हें एडिडास गोल्डन शू वॉर्ड से नवाजा गया था।

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