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फिल्‍म रिव्‍यू -'राब्ता' : जन्म-जन्मांतर के प्यार में सुशांत-कृति की केमिस्ट्री का तड़का

July 27th, 2017 16:36 IST
फिल्‍म रिव्‍यू -'राब्ता' : जन्म-जन्मांतर के प्यार में सुशांत-कृति की केमिस्ट्री का तड़का

राब्ता

रेटिंग: 2.5/5

कास्‍ट: सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, जिम सर्भ

डायरेक्‍टर: दिनेश विजान

समय: 2 घंटे 34 मिनट

कहानी
शर्टलेस शिव (सुशांत सिंह राजपूत) की एंट्री गुरूद्वारा में पानी से सिक्स एब्स के साथ निकलते हुए होती है. फिल्म पहले शॉट के साथ शुरू होती है. शिव को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट मे एक बैंकर की नौकरी मिल जाती है. लोग सोचते हैं कि बैंकर बोरिंग होते हैं लेकिन ये पंजाबी मुंडा काफी गुडलुकिंग है, अपनी पटाने वाली लाइन के साथ फ्लर्ट करता है. एक डेट पर उसकी नजर बेहद क्यूट सी सायरा पड़ती है. बस उसी समय शिव को सायरा पसंद आ जाती है और सायरा को भी धीरे धीरे शिव अच्छा लगने लगता है. इन सबके बीच सायरा को पानी में डूबने के और पुरानी जिंदगी के धुंधले सपने आना बंद नहीं होते हैं. वो हाइड्रोफोबिया से भी ग्रसित है. उसका शक तब बढ़ जाता है जब उसे शिव के साथ एक अलग ही कनेक्शन समझ आता है और एक शख्स उन्हें बताता है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है. जी मर्चेंट (जिम सरभ) एक शराब व्यापारी और उसके आस-पास एक अलग ही आबोहवा है. सायरा को उससे भी कुछ कनेक्शन महसूस होता है. बाकी फिल्म इस कहानी के बारे में आगे बताती है.

डायरेक्शन
बॉलीवु़ड में कई फिल्में पुर्नजन्म पर बन चुकी हैं. लेकिन राब्ता से डेब्यू कर रहे डायरेक्टर दिनेश विजन ने एक अलग तरह की फिल्म बनाई है खासकर फिल्म के बैकड्रॉप और प्लॉट की बात की जाए तो. हालांकि वो फिल्म को रूढ़िवादी सोच और लॉजिक से बचा नहीं पाते हैं. वो अपने लीड स्टार्स की केमेस्ट्री ऑन्स्क्रीन शानदार तरीके से दिखाने में कामयाब रहे. फिल्म के दोनों हिस्सों में उनकी केमेस्ट्री बहुत अच्छी है. वो पिछली जिंदगी को अच्छे से दिखा पाने में कामयाब नहीं रहे और ये आधा अधूरा आइडिया लगता है. फिल्म का फर्स्ट हाफ सुशांत-कृति के लव ट्रैक पर पूरी तरह आधारित है.उनका रोमांस आपको भी पसंद आएगा. फिर भी आपका ध्यान घड़ी की सुईयों पर जाएगा क्योंकि प्लॉट को काफी खींचा गया है.
 
परफॉर्मेंस
सुशांत सिंह राजपूत अपनी एक्टिंग से एक बार फिर आपका दिल जीत लेंगे. वो अपने माचो अंदाज में काफी सहज भी लगे हैं.वहीं एक योद्धा के रूप में भी वो काफी पावरफुल लगे हैं. कृति सेनन भी फिल्म में अच्छी लगी हैं. साथ ही उनकी एक्टिंग भी दमदार हैं. जिम सरभ की शुरुआत तो बड़े ही शानदार तरीके से होती है लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे ही उनका किरदार स्टीरियोटाइप्ड होते चला जाता है. राजकुमार राव भी फिल्म में है और मुमकिन है कि उनके मेकअप की वजह से आपको उनको पहचान नहीं पाएं. वो एक बूढ़े के किरदार में नजर आते हैं, लेकिन उनकी धार इस फिल्म में दिखाई नही देती.
 
म्यूजिक
फिल्म में प्रीतम का शानदार संगीत है,जो दर्शकों को बांध कर रखता है.
 
इस फिल्म को देखने की वजह 
सुशांत सिंह राजपूत और कृति सेनन की कमेस्ट्री, रोमांटिक सीन्स.
 
इस फिल्म का नेगेटिव पाइंट
 
टीवी सीरीज और हॉलीवुड फिल्‍मों की याद
 
फिल्‍म का पहला भाग राह चलते बातचीत की तरह है. यूरोप की खूबसूरत सड़कें हैं. सनसेट से पहले का माहौल है. फिर इसमें कबीले की कहानी जुड़ती है. ये ऐसा लगता है जैसे मशहूर अंग्रेजी टीवी सीरीज ‘गेम ऑफ थ्रोन्‍स’ के डॉथराकीज की जगह मुराकीज को रख दिया गया है. फिल्‍म के अंत का एक सीन तो ‘टाइटैनिक’ की याद दिलाता है.
 
जबरन थोपी-सी प्रेम कहानी
प्रेम कहानी बहती हवा की तरह होती है. इसे आप जबरन थोप नहीं सकते. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास खूबसूरत दिखने वाले एक्‍टर्स हैं और उनके हाथों में फूल और चॉकलेट है. फ्लैशबैक में जाकर भी प्‍यार की गहराई नहीं बढ़ाई जा सकती, जब तक कि उसमें जुनून ना हो. ‘राब्ता ’ इन्‍हीं पैमानों पर पिटती है. यह प्‍यार में ताकत पर भरोसा करती है, प्‍यार की ताकत पर नहीं.
 
 
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