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रोटोमैक स्कैम: बेटे के साथ एक दिन की ट्रांजिट रिमांड पर विक्रम कोठारी

September 06th, 2018 15:18 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने रोटोमैक पेन के मालिक विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल कोठारी को एक दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेजने की अनुमित दे दी है। दोनों को अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल के सामने पेश किया गया। सीबीआई ने शुक्रवार को विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल को 3,695 करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुकाने से जुड़े एक मामले में शुक्रवार को अदालत में पेश किया और उन्हें लखनऊ ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी।

बता दें कि उन्हें ऋण अदायगी के कथित उल्लंघन को लेकर गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार सात बैंकों के एक समूह ने रोटोमेक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को 2008 के बाद से 2,919 करोड़ रुपये का ऋण दिया। यह राशि भुगतान संबंधी बार-बार उल्लंघन के कारण ब्याज समेत 3,695 करोड़ रुपये हो गई। बैंक ऑफ बड़ोदा की शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई की है। बैंक ऑफ बड़ोदा ने नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चौकसी की तरह कोठारी के भी विदेश भाग जाने की आशंका से सीबीआई से संपर्क किया था। सीबीआई ने विक्रम, उनकी पत्नी साधना, पुत्र राहुल और अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

18 फरवरी को केस दर्ज
सीबीआई ने रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी साधना कोठारी और बेटे राहुल कोठारी के खिलाफ 18 फरवरी को केस दर्ज किया था। मामला सामने आने के बाद इन्हें कानपुर से दिल्ली बुलाया गया और 4 दिन की पूछताछ के बाद गुरुवार रात को विक्रम कोठारी और उनके बेटे को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया।

इन बैंकों से लिया लोन 

बैंक ऑफ इंडिया - 754.77 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ बड़ौदा - 456.63 करोड़ रुपए
इंडियन ओवरसीज बैंक - 771.77 करोड़ रुपए
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया - 458.95 करोड़ रुपए
इलाहाबाद बैंक - 330.68 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ महाराष्ट्र - 49.82 करोड़ रुपए
ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स - 97.47 करोड़ रुपए

इस तरह से इन 7 बैकों से लिया गया ये लोन टोटल 2919.39 करोड़ रुपए है। इस लोन पर इंटरेस्ट मिलाकर ये पूरी रकम 3695 करोड़ रुपए बन जाती है। कोठारी ने अब तक ने ये मूलधन चुकाया है और न ही इस पर लगा इंटरेस्ट दिया है।

क्या है पूरा घोटाला
दरअसल, रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने देश के 7 नेशनलाइज्ड बैंकों से 2919.29 करोड़ का लोन लिया, जो इंटरेस्ट लगने के बाद 3695 करोड़ तक पहुंच गया। बैंकों ने आरोप लगाया कि विक्रम कोठारी ने न ही लोन की रकम लौटाई और न ही इंटरेस्ट चुकाया। इसके बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक ऑथराइज्ड कमेटी बनाई। इस कमेटी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया। विल्फुल डिफॉल्टर वो होता है, जो जनबूझकर लोन नहीं चुकाता है।

हाल ही में जब पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में हुए घोटाले का खुलासा हुआ तो विक्रम कोठारी का नाम भी सामने आ गया। कानपुर के माल रोड पर मोजूद रोटोमैक कंपनी के ऑफिस पर भी जब ताला लगा मिला, तो खबरें आई कि विक्रम कोठारी देश छोड़कर भाग गया। इसके बाद कोठारी ने अपनी सफाई में कहा कि वो कानपुर में ही है और अपना पूरा लोन जल्द ही वापस करेगा। 18 फरवरी को सीबीआई ने विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी साधना कोठारी और बेटे राहुल कोठारी समेत कई अत्रात बैंक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया और गुरुवार को उनकी गिरफ्तारी की गई।

विक्रम कोठारी के बारे में 
विक्रम कोठारी मनसुख भाई कोठारी के बेटे हैं। मनसुख भाई कोठारी ने अपने दो बेटों विक्रम और दीपक के साथ 1973 में मिलकर पान पराग के नाम से पान मसाला बनाना शुरू किया। कोठारी परिवार पान मसाला के लिए जल्दी ही फेमस हो गया और देखते ही देखते पान पराग देश का बड़ा ब्रांड बन गया। मनसुख भाई कोठारी के निधन के बाद विक्रम और दीपक के बीच बंटवारा हुआ और साल 1992 में विक्रम कोठारी पान पराग से अलग हो गए और रोटोमैक कंपनी की शुरुआत की। रोटोमैक कंपनी पेन की दुनिया में सबसे बड़ी ब्रांड बन गई और विक्रम कोठारी को 'किंग ऑफ पेन' कहा जाने लगा। 

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