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अर्धकुंभ 2019 : देश की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने आते हैं अखाड़ों के संत

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 03rd, 2019 14:47 IST

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अर्धकुंभ 2019 : देश की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने आते हैं अखाड़ों के संत

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। ये तो हम सभी जानते हैं कि भारत में ही नहीं बल्कि देश- विदेशों में भी कुंभ  मेले का कितना अधिक और बड़ा महत्व होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार साधुओं और संन्यासियों के अलग-अलग अखाड़ों की धर्म को लेकर अलग-अलग विचार विर्मश होते हैं। आपको बता दें कि इन सभी अखाड़ों में से जूना अखाड़ा सबसे बड़ा अखाड़ा है। इसके बाद निरंजनी और महानिर्वाणी अखाड़ा सबसे बड़े अखाड़े हैं। बता दें कि 15 जनवरी से अर्धकुंभ मेले की शुरुआत हो जाएगी, जो 4 मार्च को खत्म होगी। इस मेले में देशभर के अखाड़ों से आए साधु-संत आकर्षण का खास केंद्र होते हैं। तो आज हम आपको यहां निरंजनी अखाड़े के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिनके बारे में जानकर आप भी आश्चर्यचकित रह जाएगें। 

पढ़े- लिखे विदूान, साधु- महात्मा
आमतौर पर साधु संतों को देखकर लोगों के मन में धारणा होती है कि वे कम ही पढ़े-लिखे होंगे, लेकिन यहां बात उसके ठीक उलट ही है। इस अखाड़े के साधु संत ना कि सिर्फ शिक्षित हैं बल्कि उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त कर कई सारी यूनिवर्सिटीज में लेक्चर भी दिये हैं। वैसे तो इस अखाड़े का महामंडलेश्वर बनने के लिए कोई निश्चित शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं होती। अखाड़ों में महामंडलेश्वर बनने के लिए व्यक्ति में वैराग्य और संन्यास का होना सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन इस अखाड़े में एक से बढ़ कर एक पढ़े- लिखे साधु- महात्मा हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो निरंजनी अखाड़े के करीब 70 प्रतिशत साधु- संतों ने उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त की हुई है। जिनमें कोई वकील, तो प्रोफेसर, तो कोई डॉक्टर की डिग्री लिए हुए हैं। अखाड़े के नियमों के अनुसार महामंडलेश्वरों का सांसरिक जीवन से कोई संबंध नहीं होना चाहिए। आपको बता दें कि निरंजनी अखाड़े के एक साधु, स्वामी आंनदगिरी महाराज ने Net क्वालिफाइड किया हुआ है। इन्होंने देश- विदेशों की कई यूनिवर्सिटीज में लेक्चर भी दिये हैं जिसमें आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम शिलांग, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड और सिडनी यूनिवर्सिटी आदि शामिल है। बता दें कि अभी आंनदगिरी महाराज बनारस से पीएचडी भी कर रहें हैं।

हजारों साल पुराना है इतिहास
आपको बता दें कि आज हम जिस अखाड़े की बात कर रहें हैं उसका इतिहास हजारों साल पुराना है। निरंजनी अखाड़ा की स्थापना सन 904 में विक्रम संवत 960 कार्तिक कृष्णपक्ष दिन सोमवार को गुजरात की मांडवी नाम की जगह पर हुई थी। जबकी इतिहासकार जदुनाथ सरकार इसे 1904 साल पुराना बताते हैं। प्रमाणों के मुताबिक इस निरंजनी अखाड़े की स्थपना विक्रम संवत 960 में हुई थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस अखाड़े की नींव मौनी सरजूनाथ गिरि, पुरुषोत्तम गिरि, हरिशंकर गिरि, रणछोर भारती, जगजीवन भारती, आदि महंतो ने मिलकर रखी थी। अखाड़ा का मुख्य तीर्थ स्थान प्रयागराज में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस अखाड़े में फिलहाल 10 हजार से अधिक नागा संन्यासी हैं, जबकि महामंडलेश्वरों की संख्या 33 है। 

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