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गणेश पूजा का बड़ा दिन, उत्तम फल प्रदान करेगी ये आसान विधि

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 20th, 2018 07:36 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गणपति पूजन के लिए विशेष बतायी गई है। पूर्णिमा के बाद आने वाली इस चतुर्थी को संकष्टी और संकटा चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन बप्पा को प्रसन्न करने में कोई कसर ना लगाएं। इस दिन बप्पा हर भक्त की प्रार्थना सुनते हैं और उसे निराश नही होने देते। यहां हम आपको ऐसी सरल पूजा विधि बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाकर आप आसानी से गजानन को प्रसन्न करत सकते हैं। इस दिन गणपति बप्पा के साथ ही चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। 

विशेष पूजा विधि

-सुबह सबसे पहले बप्पा का ध्यान करें और ऊँ श्रीगणेशाय नम: मंत्र का जाप मन ही मन करें। 

-पवित्र नदी में स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्रों को धारण करें। 

-इसके बाद आसान पर बैठकर विधि अनुसार बप्पा के मंत्र का जाप करते हुए गणपति पूजन प्रारंभ करें। इस दौरान अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। 

-बप्पा के विभिन्न नामों का स्मरण, जाप 108 बार करें। उन्हें दुर्वा, पुष्प के साथ ही मोदक भी अर्पित करें। ये संकटाहर्ता को अत्यधिक प्रिय हैं। इनसे वे जल्दी ही प्रसन्न होते हैं।

-इसके पश्चात चंद्रमा का संध्याकाल में पूजन करें। 

-शुक्रवार के दिन हाेने की वजह से इस दिन माता लक्ष्मी की भी कृपा है। अतः आप लक्ष्मी मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। यह विधि विशेष मुहूर्त में उत्तम फलों की प्रदायी है।

व्रत का महत्व

यह पूजन धन-धान्य ही नही पारीवारिक शांति के लिए भी उर्पयुक्त बताया गया है। इसे करने से सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य प्रबल होता है वहीं जो भी भक्त इस चतुर्थी पर गणेश पूजन विधि-विधान से कर उन्हें उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करता है उसकी मनोकाना अवश्य ही पूर्ण होती है। इस व्रत को लेकर मान्यता है कि इसे स्वयं भगवान शिव ने भी धारण किया था। माता पार्वती ने स्वयं इस व्रत की महिमा बतायी है। संकटी या तिल चतुर्थी के इस व्रत को धारण करने वालों के सभी संकट दूर होते हैं।

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