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दैनिक भास्कर का ‘सेव गर्ल चाइल्ड अभियान’, विश्व में भी मान बढ़ा रहीं बेटियां

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 19th, 2017 15:24 IST

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डिजिटल डेस्क, नागपुर।  समाज के सामने नित नई मिसाल पेश करने की  कड़ी में दैनिक भास्कर ने जब ‘सेव गर्ल चाइल्ड अभियान’ की शुरुआत की तो  शहर की उच्च पदस्थ महिलाओं ने भी इसमें न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि बेटी बचाने मैसेज भी दिया। महिला विभूतियों ने माना कि बेटी बचाना न सिर्फ हर व्यक्ति का दायित्व है, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। वे लोग बड़े भाग्यशाली हैं, जिनके घर बेटियां हैं। बेटियाें के नहीं होने से संपूर्ण मानव जाति नष्ट हो जाएगी। बात चाहे इतिहास की हो या वर्तमान की, बेटियां देश का ही नहीं, विश्व का भी मान बढ़ा रही हैं। बेटी बचाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध को रोकने की जरूरत है। बेटे तो एक कुल को तारते हैं, जबकि बेटियां दो-दो कुल को तारती हैं।  दैनिक भास्कर कार्यालय में महापौर नंदा जिचकार द्वारा अभियान का शुभारंभ किया गया। 
अभियान की रूपरेखा: अभियान तीन चरणों में चलाया जाएगा। प्रथम चरण में "बेटी बचाओ' विषय पर शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता, दूसरे चरण में ऐसे पैरेंट्स, जिन्होंने गर्ल चाइल्ड एडाप्ट की है, उन्हें सम्मानित किया जाएगा और तीसरे चरण में "सेव गर्ल चाइल्ड' विषय पर  ड्राइंड प्रतियोगिता का आयोजन 7 जनवरी 2018 को ट्रैफिक पार्क में किया जाएगा।
सबसे पहले पुरुष को आगे आना चाहिए: महापौर नंदा जिचकार ने इस अवसर पर कहा कि सबसे पहले मेल पर्सन्स को ही इसके लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि एक महिला तो बेटी बचाओ कहती है, पर जब तक पुरुष इस काम में आगे नहीं आएंगे, तब तक यह संभव नहीं है। समाज के सभी लोगों का बेटियों के प्रति पॉजिटिव नजरिया होना चाहिए। तभी हमारा देश तरक्की कर पाएगा अौर बेटियां सुरक्षित महसूस कर पाएंगी। 
पुलिस अापकी मदद के लिए है: भंडारा की पुलिस अधीक्षक विनीता शाहू का कहना है कि लोगों के मन में पुलिस के प्रति डर होता है, पर लोगों को अपनी सोच बदलनी है। लड़कियों के मन में यह बात आती है कि पुलिस में शिकायत होगी, तो उनकी बदनामी होगी। पुलिस का काम जनता की सेवा करना है, इसलिए उससे डरने की बजाय उसे अपनी समस्या बताएं। लड़कियों को िशक्षित होना बहुत जरूरी है, तभी वह सही-गलत का फर्क समझ पाएंगी। 
डॉक्टर को दोष देना गलत है : पार्षद प्रगति पाटील ने कहा कि सेक्स डिटरमिनेशन टेस्ट के लिए डॉक्टर्स को दोष दिया जाता है, पर इसके लिए स्वयं पैरेंट्स और फैमिली जवाबदार होते हैं, जो महिलाओं को इसके लिए हॉस्पिटल ले जाते हैं। लड़की पैदा होगी, तभी वह मां बनकर समाज श्रृंखला को आगे बढ़ा सकती है। 
समस्या का समाधान ही इसका उपाय : पार्षद आभा पांडे ने इस अवसर पर कहा कि सबसे पहले तो दैनिक भास्कर को कार्यक्रम के लिए धन्यवाद देती हूं। सभी लोग सेव गर्ल चाइल्ड समस्या की बात करते हैं, पर इसका समाधान करना सबसे ज्यादा जरूरी है। निर्भया जैसी घटना हमारे देश में हुई, जो शर्म की बात है। आज समाज में लड़कियां उच्च पदों पर हैं, जो हमारे लिए गर्व का विषय है। 
शिक्षा, संस्कृति और संस्कार की कमी से मिल रहा बढ़ावा: पार्षद चेतना टांक ने कहा कि लड़के और लड़की के अंतर की शुरुआत घर से होती है। लड़कों की अपेक्षा लड़कियों को कम सुविधाएं दी जाती हैं। सबसे पहले लड़कियों को शिक्षित करने के बारे में सोचना चाहिए। उसे संस्कार देने चाहिए और मन से इस बात को निकाल देना चाहिए कि लड़की वंश को आगे नहीं बढ़ा सकती है। अगर इन तीन बातों का स्मरण सभी कर लेंगे, तो हमें सेव गर्ल चाइल्ड के लिए कैम्पनिंग करने की जरूरत नहीं होगी। 
 

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