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शाह के बयान पर शिवसेना मंत्री बोले- पटकने की बात की तो गाड़ देंगे, कांग्रेस ने कहा लो हो गई नूरा कुश्ती शुरु

January 08th, 2019 21:29 IST
शाह के बयान पर शिवसेना मंत्री बोले- पटकने की बात की तो गाड़ देंगे, कांग्रेस ने कहा लो हो गई नूरा कुश्ती शुरु

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के ‘शिवसेना को पटक देने वाले’ बयान से पार्टी के नेता तमतमाए हुए नजर आ रहे हैं। भाजपा और शिवसेना दोनों दलों के बीच खटास बढ़ती चली जा रही है। मंगलवार को मंत्रालय में शिवसेना के नेता और प्रदेश के पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने कहा कि शाह का बयान अशोभनीय है। यदि कोई यहां पर आकर पटक देने की बात करेगा तो उसको पटक-पटक कर गाड़ देंगे। चाहे वह कितना भी वजनदार क्यों न हो।

मंत्री कदम ने कहा कि पटकने की भाषा बोलने वाले को जनता के वोटों के माध्यम से जवाब मिलेगा। सहयोगी दल से गठजोड़ के सवाल पर कदम ने कहा कि भाजपा के साथ अभी गठबंधन बना हुआ है, लेकिन दोस्ती टूट गई है। हमारा भाजपा से प्रेम और अपनत्व खत्म हो गया है। कदम ने कहा कि शिवसेना को जब अकेले चुनाव अलग लड़ना है, तो भाजपा जबरदस्ती क्यों कर रही है। 

उनके जैसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते: पाटील 
दूसरी ओर कदम के आक्रामक तेवर पर भाजपा के नेता व प्रदेश के राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि हम उनके जैसी भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते। पाटील ने कहा कि भाजपा और शिवसेना की विचारधारा समान है। इसलिए प्रयास यह किया जा रहा है कि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़े। यदि हम साथ लड़े तो कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के चुनाव जीतने की संभावना कम रहेगी। दोनों दलों के बीच गठबंधन नहीं हो पाया तो अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे, लेकिन हम समझते हैं कि गठबंधन नहीं होने का कोई कारण नहीं है। शिवसेना की तीखी आलोचना पर पाटील ने कहा कि हमारी कोई मजबूरी नहीं बल्कि सहनशीलता है।

शिवसेना-भाजपा का झगड़ा मिलीभगत 
लोकसभा चुनाव के पहले मित्र दलों भाजपा-शिवसेना के बीच शुरु जुबानी जंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण नूरा कुश्ती मानते हैं। मंगलवार को चव्हाण ने कहा कि यह दोनों दलों की मिलीभगत है। इसके पहले भी भाजपा-शिवसेना ऐसा कर चुके हैं और चुनावों में इससे कांग्रेस को नुकसान हुआ है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। चव्हाण ने कहा कि इस बार जनता सब समझ चुकी है। भाजपा-शिवसेना साथ लड़े अथवा अलग-अलग इनकी हार तय है।

बता दें कि इसके पहले केंद्र व राज्य की सत्ता में भागीदार शिवसेना और भाजपा नेताओं ने कल्याण, मुंबई व मीरा-भायंदर महानगरपालिका चुनाव में एक दूसरे पर जमकर हमला बोला था। हालांकि इससे दोनों दलों को लाभ हुआ और इन दोनों मित्र दलों के झगड़े के चलते कांग्रेस-राकांपा चुनावी परिदृश्य से बाहर हो गए थे।  
 

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