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कोशिशों पर खड़े सवालों के बीच अयोध्या पहुंचे श्रीश्री रविशंकर

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 16th, 2017 12:39 IST

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डिजिटल डेस्क, लखनऊ। अयोध्या मामले को सुलझाने में जुटे आर्ट ऑफ लिविंग के गुरु श्रीश्री रविशंकर के लिए गुरुवार का दिन बहुत अहमियत रखता है। रविशंकर आज राम मंदिर मामले में मध्यस्थता के लिए अयोध्या पहुंच गए हैं। गौरतलब है कि वे राम नगरी पहुंचकर सभी पक्षकारों से बात करेंगे। बुधवार को श्रीश्री ने लखनऊ में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई हिंदू संगठनों के साथ मुलाकात की।

उधर अयोध्या विवाद से जुड़े सभी पक्षकारों ने पहले ही साफ कर दिया है कि किसी भी तरह का समझौता मुमकिन नहीं है। विहिप ने बयान जारी कर साफ कहा कि बातचीत की जरूरत नहीं है। पुरातत्व सबूत हिंदुओं के पक्ष में हैं और कोर्ट सबूतों से चलती है। वहीं अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि श्रीश्री बताएं उनका क्या नया फॉर्मूला है, क्योंकि 12 साल पहले उनकी ऐसी कोशिश विफल हो चुकी है। 

बीजेपी छोड़ रही है साथ

अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए श्री श्री रविशंकर की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी के दो बड़े नेताओं ने उनकी इस कोशिश पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राम मंदिर विवाद से जुड़े बीजेपी के पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने कहा है कि रविशंकर कौन होते हैं मध्यस्थता करने वाले। उन्होंने कहा कि अयोध्या विवाद में जेल हम गए, लाठियां हमने खाईं और अब अचानक से श्रीश्री रविशंकर आ गए, ये कौन होते हैं फैसला करने वाले। वेदांती के अलावा भाजपा के महासचिव राम माधव की तरफ से भी एक बयान आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है, कोर्ट की प्रकिया पूरी होने के बाद ही इस तरह की बातचीत की जानी चाहिए। उधर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने श्री श्री के प्रस्ताव को टालते हुए 16 नवंबर को अयोध्या में मुलाकात से इनकार कर दिया है।

मध्यस्थता करने वाले रविशंकर कौन ?


बीजेपी के पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने कहा, 'अयोध्या में मंदिर बनाने के लिए हल जेल गए हैं, हमनें लाठियां भी खाई है और अब देख रहे हैं कि अचानक से श्रीश्री रविशंकर आ गए हैं मंदिर बनवाने।' उन्होंने कहा कि रविशंकर कौन होते है मध्यस्थता करवाने वाले, वे तब कहां थे जब मंदिर के लिए संघर्ष चल रहा था। वेदांती  ने आगे कहा कि अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनेगा तो किसी भी कीमत पर मस्जिद भी नहीं बननी चाहिए।

'पहले सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया पूरी हो' 


बीजेपी नेता राम माधव ने इस मुद्दे पर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में ये मामला चल रहा है और इसे चलने देना चाहिए। सुनवाई प्रकिया पूरी होने के बाद इस पर बात और विचार किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर बहस बाद में की जा सकती है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बातचीत से इनकार


सुन्नी वक्फ बोर्ड से समर्थन जताते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी बातचीत से मना कर दिया है। इन दोनों मुस्लिम बॉडीज का कहना है कि श्री श्री के पास इस मामले में कोई लीगल स्टैंड नहीं है और इसलिए वह बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं। इससे पहले अयोध्या में शिया वक्फ बोर्ड की मामले के पक्षकारों से बातचीत में भी सुन्नी बोर्ड ने आपत्ति जताई थी। सुन्नी बोर्ड के पक्षकार इकबाल अंसारी ने मीटिंग से बाहर निकलकर शिया बोर्ड के चेयरमैन रिजवी के फार्मूले को एकपक्षीय बताकर खारिज कर दिया था।

योगी - श्रीश्री की मुलाकात

अयोध्या मुद्दे की महत्वता समझते हुए रविशंकर ने बुधवार को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। कयास लगाए गए हैं कि रविशंकर ने योगी के साथ इस विवाद के समाधान के तरीकों पर बात की होगी। बता दें कि अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए खुद रविशंकर आगे आए हैं। 

राजनीतिक हस्तक्षेप से हल नहीं निकलते 


फिरंगी महली के खालिद रश्दी फिरंगी का रविशंकर से मुलाकात के ऊपर कहना है कि हम आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर का बहुत सम्मान करते हैं। अगर उनके पास अयोध्या मुद्दे का कोई हल है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सामने जाकर उसको बताना इसका चाहिए। क्योंकि अगर इस मुद्दे में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप होता है तो इसका हल निकलना मुश्किल हो जाएगा। खालिद ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोर्ट के फैसले के आधार पर काम करेगा और हमें इस मामले को लेकर किसी तरह का कोई पत्र नहीं मिला है।

ओवैसी ने कसा था तंज


एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राम मंदिर मुद्दे पर श्री श्री रविशंकर पर तंज कसते हुए कहा कि रविशंकर झूठ बोल रहे हैं, वह मुस्लिम पर्सनल लॉ से नहीं मिले हैं। ओवैसी ने कहा कि ऐसा करके उन्हें कोई नोबेल पुरस्कार नहीं मिल जाएगा।

5 दिसंबर से शुरू होगी SC में सुनवाई 


अयोध्या मामले में सुनवाई करते हुए SC ने 11 अगस्त को कहा था कि 5 दिसंबर से वह इस मामले में अंतिम सुनवाई की शुरुआत करेगा। वहीं वसीम रिजवी का कहना है कि यूपी शिया वक्फ बोर्ड भी समझौते की शर्तों और नियमों का मसौदा तैयार कर रहा है। 
 

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