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कोयले की कमी के कारण लोडशेडिंग का खतरा

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 06th, 2018 12:46 IST

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कोयले की कमी के कारण लोडशेडिंग का खतरा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बिजली घरों में चल रही कोयले की कमी लोडशेडिंग की स्थिति ला सकती थी लेकिन ठंड की वजह से राहत मिल पाई है। ऊर्जामंत्री के दावों के बावजूद अभी भी प्रदेश के बिजलीघर कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। ठंड के बढ़ने और कृषिकार्य मेें बिजली की जरूरत में कमी से प्रदेश लोडशेडिंग से बचा है, नहीं तो कोयला फिर से प्रदेश को लोडशेडिंग में झोंक देता। हालांकि मांग में कमी के बावजूद अभी भी पावर एक्सचेंज से करीब 200 मेगावॉट बिजली महावितरण को खरीदनी पड़ रही है। प्रदेश के कोल इंडिया से लिंकेज प्राप्त (संलग्न) 16 में से 10 बिजलीघरों में पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध नहीं है। 

बिजली घरों की स्थिति
प्रदेश के 5 बिजलीघरों में अति नाजुक स्थित है। यहां  2 दिन या इससे कम का कोयला उपलब्ध है। जबकि 5 बिजली घरों में 5 या 5 दिन से कम पर 2 दिन से अधिक का कोयला स्टाक में है। इसमें महाजेनको के परली विद्युत केंद्र में तो कोयले का स्टाक ही नहीं हैं। जबकि बुटीबोरी स्थित रिलायंस पावर के बिजली घर में 1 दिन, खापरखेड़ा व जीएमआर वरोरा में 2-2 दिन तक बिजलीघर को चलाने का कोयला उपलब्ध है। इसके अलावा मौदा स्थित एनटीपीसी के बिजली घर में 3 दिन का, महाजेनको के भुसावल विद्युत केंद्र तथा तिरोड़ा स्थित अदानी पावर के प्लांट में 4-4 दिन तथा कोराड़ी व वर्धा स्थित बिजलीघर में 5-5 दिन का कोयला उपलब्ध है। 

घटी मांग इसलिए बचे 
प्रदेश की विद्युत मांग सितंबर-अक्टूबर में 23 हजार मेगावाॅट तक पहुंच गई थी। उस समय महावितरण ने लघु करारों और पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदकर प्रदेश को लोडशेडिंग से बचाने की कोशिश की थी। इसके बावजूद "जी' श्रेणी में लोडशेडिंग करनी पड़ गई थी। ठंड का असर बढ़ने तथा कृषि कार्य में बिजली की मांग कम होने से प्रदेश विद्युत मांग 18 से 19 हजार मेगावाॅट के मध्य है। जबकि मुंबई छोड़कर शेष महाराष्ट्र में बिजली की मांग 14500 से 15500 मेगावाॅट के मध्य है। इससे प्रदेश में लोडशेडिंग की स्थिति निर्मित नहीं हुई। हालांकि महावितरण को अभी भी कुछ मात्रा में बिजली पावर एक्सचेंज से तथा लघु करारों के मार्फत खरीदनी पड़ रही है। 
 

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