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कोर्ट के आदेश के बाद भी दस साल बाद में अपनी ही जमीन खाली नहीं करवा पाया नजूल विभाग

कोर्ट के आदेश के बाद भी दस साल बाद में अपनी ही जमीन खाली नहीं करवा पाया नजूल विभाग

डिजिटल डेस्क, कटनी। शहर में नजूल विभाग की बेशकीमती जमीनों को निगलने का काम लोग कर रहे हैं। नगर में भू-माफियाओं के आगे नजूल विभाग और नगर निगम के चौकीदारों ने घुटने टेक दिए हैं। शिकायत हुई, मामला न्यायालय में गया। यहां से बेदखली का आदेश भी दिया गया। इसके बावजूद जमीन खाली कराने के लिए अफसर आगे नहीं आए। यह खेल साल भर चलता रहता है। साल भर में करीब सात जगहों में बेदखली के आदेश दिए गए। लेकिन नजूल की भूमि को अफसर खाली नहीं करा पाए। इस खेल को अशोक गोयनका के अवैध कब्जे को लेकर समझा जा सकता है। जिसमें नौ वर्ष बाद भी मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव के आदेश का पालन अफसर नहीं करा सके हैं। विधानसभा और राज्य सूचना आयुक्त में मामला पहुंचने पर फिर से नजूल विभाग बेदखली के आदेश का राग अलापने में लगा हुआ है।  

पीएस दे चुके हैं आदेश 
यह मामला करीब 23 वर्ष पुराना है। जब अतिक्रमणकारी अशोक गोयनका के आगे पूरा प्रशासन ही घुटनों के बल चलते हुए दिखाई दिया। शिकायत के बाद मामला न्यायालय में पहुंचा। 27 सितम्बर 2010 को मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव राघव चन्द्रा ने इस संबंध में कलेक्टर को आदेश दिया कि अशोक कुमार गोयनका द्वारा नजूल सरकार जैर इंतजाम पीडब्ल्यूडी की भूमि खसरा नंबर 1133/1,3,4 में ये 462 वर्गफुट पर मकान बनाकर अतिक्रमण आदेश उपरांत बेदखली नहीं की गई। इसके बाद दो बार इस संबंध में और निर्देश दिए गए।  

राजस्व मंत्री ने भी माना अतिक्रमण
राजस्व मंत्री ने भी यह माना था कि इस तरह का आदेश मध्यप्रदेश शासन राजस्व प्रमुख सचिव द्वारा दिया गया है। विधानसभा में भी शासकीय भूमि में अतिक्रमण का मामला वर्ष 2015 में पहुंचा। जिसमें विधायक ने राजस्व मंत्री से इस संबंध में होने वाली कार्यवाही की जानकारी चाही थी। जिसमें राजस्व मंत्री ने यह उल्लेख किया था कि अनाधिकृत व्यक्तियों को कब्जा हटाने के लिए लिखा गया था। इस संबंध में बेदखली को लेकर जवाब दिया गया था कि रिकार्डों का निरीक्षण कर स्थल की जांच की गई है। जिसके आधार पर तहसील न्यायालय कटनी में कार्यवाही प्रचलित में है।  

फिर से बेदखली का राग  
दस दिन पहले फिर से नजूल विभाग बेदखली का राग अलापते हुए अशोक गोयनका को नोटिस जारी किया है। इसी वर्ष मार्च माह में यह मामला राज्य सूचना आयुक्त के पास पहुंचा। जिसमें संबंधित विभाग के अधिकारियों पर धारा 20 के तहत कार्यवाही करने की चेतावनी दी गई। आयुक्त का पत्र मिलने के बाद अफसरों के हाथ-पैर फूल गए। 9 मई को न्यायालय के पारित आदेश 13.11.1996 का हवाला देते हुए कहा गया है कि ग्राम मुड़वारा के खसरा नंबर 1133/1-2-3 का अंश भाग 572 वर्गफिट भूमि पर अनावेदक द्वारा पक्का मकान एवं दुकान बनाकर बेजा  कब्जा कर लिया गया है। पंद्रह दिवस के अंदर कब्जा हटाते हुए भूमि के मूल स्वरुप को वापस करने को कहा गया है।  
 

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