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ट्रिपल तलाक पर SC को कानून बनाने का कोई 'हक' नहीं : AIMPLB

January 10th, 2018 11:19 IST
ट्रिपल तलाक पर SC को कानून बनाने का कोई 'हक' नहीं : AIMPLB

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ट्रिपल तलाक पर पिछली साल सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सवाल उठाते हुए कहा है कि 'सुप्रीम कोर्ट को कानून बनाने का कोई हक नहीं है।' मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से मौलान अताउर रहमान रश्दी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को नया कानून बनाने का हक नहीं है, वो सिर्फ मौजूदा कानून से जुड़े मामलों पर ही अपना फैसला दे सकता है। बता दें कि पिछली साल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी बताते हुए सरकार से इस पर कानून बनाने का फैसला दिया था।


शरियत में किसी भी तरह की दखलअंदाजी गलत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड के मेंबर मौलाना अताउर रहमान रश्दी ने शरियत में किसी भी तरह की दखलअंदाजी करना गलत है। मौलाना रश्दी ने ट्रिपल तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि 'सुप्रीम कोर्ट फैसले तो सुना सकता है, लेकिन उसे नया कानून बनाने का हक नहीं है। कोर्ट सिर्फ मौजूदा कानूनों से जुड़े मामलों पर ही फैसला दे सकता है।' मौलाना रश्दी ने ये भी कहा कि 'कोर्ट का इस मामले में रोल बेसिक राइट्स के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।' मौलना ने कहा कि शरियत में कोर्ट और सरकार का दखल गलत है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला

इशरत जहां और शाहबानो समेत 5 महिलाओं ने तील तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने 3:2 से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का जहां एक तरफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध किया, वहीं मुस्लिम महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक बताया। अगस्त महीने में तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर की प्रेसिडेंशियल वाली 5 जजों की बेंच ने इसे अवैध बताया। 5 में से जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस यूयू ललित ने 'तलाक-ए-बिद्दत' यानी तीन तलाक को अवैध करार दिया। जबकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने इस प्रथा पर 6 महीने तक रोक लगाने की बात करते हुए संसद से इस मसले पर कानून बनाने की बात कही थी।

क्या है तीन तलाक का कानून?

केंद्रीय कानून मंत्री ने लोकसभा में हाल ही में तीन तलाक पर बिल पेश किया। मोदी सरकार ने 'द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट' नाम से इस बिल को पेश किया है। कानून बनने के बाद यह सिर्फ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर लागू होगा। बिल में कहा गया है कि अगर कोई पति तीन बार तलाक-तलाक-तलाक कहकर डिवोर्स लेता है तो फिर इसे गैर जमानती अपराध माना जाएगा और आरोपी को 3 साल की जेल की सजा होगी। इसमे जुर्माने का प्रावधान भी है। मजिस्ट्रेट इस बात को तय करेंगे की आरोपी पर कितना जुर्माना लगाना है।

लोकसभा में पास, राज्यसभा में अटका

केंद्र सरकार की तरफ से ट्रिपल तलाक पर बिल पार्लियामेंट के विंटर सेशन में पेश किया गया था। ये बिल लोकसभा में 7 घंटे में ही पास हो गया था। विपक्षी पार्टियों ने कई संशोधन भी पेश किए थे, लेकिन सभी के सभी खारिज कर दिए गए थे। लोकसभा के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया गया। वहां एनडीए के पास बहुमत नहीं है, लिहाजा विपक्षी पार्टियों ने इस बिल का विरोध करना शुरू कर दिया। राज्यसभा में इस बिल को लेकर 3 दिनों तक हंगामा भी हुआ, लेकिन बिल पास न हो सका। 

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