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#TopStory : आधार लिंक करवाने की तारीख 31 मार्च 2018 तक बढ़ी

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 15th, 2017 13:37 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं का फायदा लेने की 'आधार कार्ड' को लिंक कराने की तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2018 तक के लिए बढ़ा दिया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने केंद्र सरकार के उस प्रपोजल को मंजूरी दे दी है, जिसमें सभी योजनाओं के लिए आधार लिंक कराने की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च 2018 करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही बैंक अकाउंट्स और पैन कार्ड से अब आधार को 31 मार्च तक लिंक कराया जा सकता है। बता दें कि गुरुवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया था। 


139 नोटिफिकेशन जारी कर चुका है केंद्र

बता दें कि केंद्र सरकार अभी तक आधार कार्ड को कई सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए 139 नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। इसमें मनरेगा से लेकर पेंशन योजना और प्रोविडेंट फंड से लेकर प्रधानमंत्री जन-धन योजना तक का फायदा लेने के लिए आधार लिंक कराना जरूरी है। सरकार के इसी फैसले पर रोक लगाने के लिए कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल की है। इस पर गुरुवार को 3 घंटे से ज्यादा देर तक सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मोबइल नंबर लिंक कराने की तारीख भी बढ़ी

वहीं मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक करने की तारीख को अब बढ़ा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले में बैंंक अकाउंट्स, पैन कार्ड और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने के लिए 31 मार्च 2018 तक का समय दिया गया है। इससे पहले मोबाइल नंबर से आधार लिंक कराने की समय सीमा 31 दिसंबर 2017 थी, जिसे बाद में बढाकर 6 फरवरी 2018 कर दिया गया था। लेकिन अब सभी योजनाओं से आधार को लिंक कराने की समय सीमा 31 मार्च तय कर दी गई है।


जनवरी में फिर शुरू होगी सुनवाई

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सरकारी योजनाओं के लिए आधार लिंक कराने अनिवार्यता के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने पर फैसला देगा। हालांकि, आधार जरूरी होगा या नहीं, इस मसले पर सुनवाई जनवरी से शुरू होगी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार की अनिवार्यता के खिलाफ जितनी भी पिटीशंस फाइल की गई है, उनपर सुनवाई 17 जनवरी से शुरू होगी।

पिटीशनर्स का क्या है कहना? 

आधार को लिंक कराने के खिलाफ पिटीशन फाइल करने वाले पिटीशनर्स का कहना है कि सरकार ने शुरू में सिर्फ 6 स्कीम्स के लिए आधार को जरूरी किया था, लेकिन बाद में इसे 139 से भी ज्यादा स्कीम्स के लिए जरूरी कर दिया गया। बता दें कि आधार को बैंक अकाउंट समेत कई योजनाओं से लिंक कराने की अनिवार्यता के खिलाफ कई पिटीशन फाइल की गई है। इन पिटीशन में कहा गया है कि आधार को कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए।

क्यों हो रही है आधार पर सुनवाई? 

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में आधार की अनिवार्यता के खिलाफ सुनवाई की गई थी, जिसपर फैसला देते हुए कोर्ट ने इसे संविधान के तहत निजता का अधिकार माना था। कोर्ट ने कहा था कि ये व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। उस वक्त पिटीशनर्स का कहना था कि आधार को हर चीज से लिंक कराना निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) का उल्लंघन है। पिटीशन में कहा गया था कि इससे संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने इसे निजता का अधिकार माना था। 

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