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राफेल डील : लीक दस्तावेजों पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित

BhaskarHindi.com | Last Modified - March 15th, 2019 00:08 IST

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राफेल डील : लीक दस्तावेजों पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित

News Highlights

  • राफेल के लीक दस्तावेजों पर केंद्र सरकार के विशेषाधिकार के दावे पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर सुरक्षित रख लिया।
  • केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत की गई दस्तावेजों की फॉटोकॉपी को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की थी।
  • सुप्रीम कोर्ट राफेल डील मामले में 14 दिसंबर, 2018 के फैसले की समीक्षा करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राफेल के लीक दस्तावेजों पर केंद्र सरकार के विशेषाधिकार के दावे को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर सुरक्षित रख लिया। केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत की गई दस्तावेजों की फॉटोकॉपी को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट राफेल डील मामले में 14 दिसंबर, 2018 के फैसले की समीक्षा करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने CJI रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली तीन जजों की बेंच को बताया था कि लीक दस्तावेजों को प्रकाशित नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस पर सरकार का विशेषाधिकार है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 और आरटीआई के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, 'साक्ष्य अधिनियम के प्रावधान के तहत, कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बिना अदालत में विशेषाधिकार प्राप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सकता है।' अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोई भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज प्रकाशित नहीं कर सकता है और राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।

एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कोर्ट से कहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान में साफ तौर पर कहा गया है कि जनहित के मुद्दे अन्य सभी से सर्वोपरी है। ऐसे में राफेल से संबंधित दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने ये भी कहा कि अटॉर्नी जनरल जिन दस्तावेजों पर विसेषाधिकार का दवा कर रहे हैं वह पहले से ही सार्वजनिक दायरे में हैं।

इससे पहले बुधवार को वेणुगोपाल राव ने कोर्ट में हलफनामा दायर किया था, इसमें कहा गया था कि इस हलफनामे में कहा गया था है कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी समीक्षा याचिका में लड़ाकू विमान से संबंधित संवेदनशील दस्तावेज संलग्न किए और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया। उनके ऐसा करने से अब ये कागज देश के विरोधियों के लिए भी उपलब्ध हो गए हैं। इसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और एक्टिविस्ट एडवोकेट प्रशांत भूषण संवेदनशील जानकारी लीक करने के दोषी हैं।

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