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स्वामी विवेकानंद ने विदेश में किया हिन्दी का प्रचार : मंत्री महादेव जानकर

January 11th, 2019 15:33 IST
स्वामी विवेकानंद ने विदेश में किया हिन्दी का प्रचार : मंत्री महादेव जानकर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। हिन्दी भाषा राष्ट्रीय भाषा है। उसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने विदेश जाकर हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार किया। उक्त विचार पशु संवर्धन मंत्री महादेव जानकर ने व्यक्त किए। उन्होंने विश्व हिंदी दिवस समारोह के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन सीताबर्डी स्थित हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभागृह में किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि श्री वाजपेयी ने भी विदेश में जाकर हिन्दी भाषा में भाषण दिया था, जो देशवासियों के लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम के दौरान कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित कवियों ने हास्य-व्यंग्य, सांप्रदायिक सद्भाव, देशभक्ति और हिंदी भाषा पर जोर दिया। 

विश्व में 30 करोड़ लोग बोलते हैं हिंदी
कार्यक्रम के दौरान प्रमुख अतिथि के रूप में भाजपा विधायक नरेंद्र पवार ने कहा कि आज पूरे विश्व में 30 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, हमारे भारत में 18 करोड़ लोग हिंदी भाषा में बात करते हैं। महापौर नंदा जिचकार ने आयोजनकर्ताओं को बधाई देते हुए कार्यक्रम की सराहना की। इस दौरान विश्व हिन्दी परिषद के महासचिव विपिन कुमार, रणवीर सिंह और वी. के. खरे मुख्य रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम में विश्व हिन्दी दिवस पुस्तिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सह-संयोजक माधुरी पालीवाल तथा मुख्य समन्वयक डॉ स्वर्णिम दीक्षित ने किया। 

कवियों ने सभी को गुदगुदाया
कवि सत्येन्द्र सत्यार्थी ने अपनी पंक्तियां हिंदी में भाषा-बोलियों की सरताज है साथ ही, उन्होंने हिंदी भाषा को बहुत ही अलग अंदाज में प्रस्तुत किया। कवि रितेश तिवारी की पंक्तियों ‘लिपि जगत की मथुरा में, हिंदी मीरा है श्याम की’ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतुल त्रिवेदी ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से सियासत और कुर्सी के खेल के बारे में कहा।  शशिकांत शर्मा ,व्यंग्यकार डॉ. नीरज आदि की प्रस्तुतियों ने सभी को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।

कवि एस. पी. सिंह की ‘जवानों जमीं पे अब तो उतारो गगन’ के साथ नई उम्मीदों को दर्शाया गया।  अनिल मालोकर ने पति-पत्नी के बीच की बातों को कुछ ऐसे अंदाज में प्रस्तुत किया कि पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कवि दयाशंकर तिवारी ‘मौन’ ने कहा, ‘ये राम की मिट्टी, रहीम का निवास, इस धरती के कण-कण में प्रेम का वास।  कार्यक्रम का संचालन कवि विनय शुक्ल ‘विनम्र’ ने किया। आभार प्रदर्शन डब्ल्यू सीएल के पीआर ओ एसपी सिंह ने किया। 
 

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