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Air India फिर हो सकती है TATA Airlines

BhaskarHindi.com | Last Modified - October 11th, 2017 16:37 IST

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Air India फिर हो सकती है TATA Airlines

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टाटा समूह ने एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी ली है। टाटा समूह के लिए एयर इंडिया सामान्य विमानन कंपनी नहीं है। यह विमानन कंपनी जेआरडी टाटा की ब्रेन चाइल्ड थी, जो देखते ही देखते दुनिया की श्रेष्ठतम विमानन कंपनियों में शुमार की जाने लगी थी। एयर इंडिया की स्थापना टाटा समूह ने ही आज से 85 साल पहले की थी। बाद में इस विमानन कंपनी का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। टाटा समूह अगर इस कंपनी का अधिग्रहण करने में सफल रहता है तो यह कंपनी राष्ट्रीयकरण के 64 साल बाद दोबारा उसके स्वामित्व में आ जाएगी। 

85 साल पहले हुई थी स्थापना
अब से 85 साल पहले सन 1932 में एयर इंडिया की स्थापना करने वाले टाटा समूह को कंपनी का नियंत्रण छोड़ना पड़ा था, लेकिन टाटा ग्रुप अब फिर से एयर इंडिया को अपना हिस्सा बनाना चाहता है। अगर टाटा ग्रुप एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लेता है तो वह एयर इंडिया का स्वामित्व उसके राष्ट्रीयकरण होने के 64 साल बाद पा लेगा। सरकार घाटे में चल रहे एयर इंडिया को बेचने की तैयारी में है। जबकि टाटा समूह के लिए यह सौदा व्यावसायिक से कहीं ज्यादा भावनात्मक सौदा है। कंपनी सूत्रों के अनुसार समूह ने घाटे में चल रही इस कंपनी को हर हाल में खरीदने का मन बना लिया है। 

पहले नाम था टाटा एयरलाइन्स 
टाटा सन्स ने टाटा एयरलाइंस की स्थापना 1932 में की थी। महत्वपूर्ण बात यह थी कि कराची से बॉम्बे की पहली फ्लाइट खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी। आजादी से पहले 1946 में टाटा एयरलाइंस सार्वजनिक कंपनी बन गई और इसका नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। वायुयान उड़ाना जेआरडी टाटा का जुनून था। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, जहाज उड़ाने के लिए क्वालिफाई करने वाले वह पहले भारतीय थे। जेआरडी टाटा को हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस 1929 में मिला था। भारत में व्यावसायिक विमानन की विधिवत शुरूआत करने वाले वह पहले व्यक्ति थे। सन 1948 में उन्होंने एयर इंडिया इंटरनेशनल की स्थापना की। सन 1978 तक उन्होंने एयर इंडिया की जिम्मेदारी संभाली। 

नेहरू ने 1953 में किया राष्ट्रीयकरण 
1953 में जब सरकार ने 'बैकडोर से', जैसा कि जेआरडी टाटा ने परिभाषित किया था, एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया। उस समय यह विमानन कंपनी दुनिया की श्रेष्ठतम एयरलाइंस में एक थी। टाटा को जब पता चला कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया है। किसी ने उनसे इस बारे में बात तक नहीं की। यह जान कर जेआरडी टाटा को बहुत झटका लगा। हालांकि जेआरडी टाटा राष्ट्रीयकरण के बाद एयरलाइंस के चेयरमैन बने रहे। उनके नेतृत्व में कंपनी 1977 तक अच्छी तरह काम करती रही। सन 1977 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने जेआरडी टाटा को चेयरमैन पद से हटा दिया। 

कई ने दिखाई दिलचस्पी फिर हटे पीछे
कभी विमानन क्षेत्र की सिरमौर रही यह कंपनी इस समय 52000 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे में है। इस कंपनी के संचालन पर सन 2014 में सत्ता में आने के बाद से केंद्र सरकार 16000 करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर चुकी है। इस कंपनी पर घाटे का बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अब स्थिति यह है कि यह कंपनी राज्य के खजाने पर भारी बोझ की तरह बन गई है और सरकार हर हाल में इससे छुटकारा पाना चाहती है। इस कंपनी को खरीदने में कई कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई लेकिन भारी भरकम वित्तीय जवाबदेहियों के चलते अंतत: वे पीछे हट गईं। अब टाटा समूह ने इसमें दिलचस्पी ली है, हालांकि उसकी दिलचस्पी की वजह व्यावसायिक न हो कर भावनात्मक ही ज्यादा है। 

क्या भावनात्मक वजह से आगे आया टाटा समूह
लेकिन क्या यह मान लिया जाना चाहिए कि टाटा समूह केवल भावनात्मक वजहों से भारी वित्तीय घाटे में चल रही इस कंपनी को खरीदने को राजी हो गया है? नहीं, दरअसल बात ऐसी नहीं है। कंपनी की वित्तीय और आपरेशनल गड़बड़ियों के बावजूद अभी कंपनी के खाते में बहुत कुछ ऐसा है, जो बहुमूल्य है। जिनके समुचित नियोजन से इस बीमार कंपनी को फिर से खड़ा किया जा सकता है। टाटा समूह से जुड़े विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी व्यापक पहुंच और विस्तार हमेशा ही लाभ का सौदा साबित होगा। इस विमानन कंपनी के पास 118 एयरक्राफ्ट हैं और डायरेक्टोरेट जनरल आफ सिविल एविएशन के आंकड़ों के अनुसार यह कंपनी अब भी सबसे ज्यादा यात्रियों की पहली पसंद बनी हुई है। यह बात किसी भी खरीददार के लिए महत्वपूर्ण है। घरेलू मार्केट में एयर इंडिया का मार्केट शेयर 13 फीसदी है, जबकि अंतराष्ट्रीय उड़ानों में इसकी क्षमता का 75 फीसदी इस्तेमाल हो रहा है।  

दो विमानन कंपनियों में पहले से है हिस्सेदारी
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन  एन चंद्रशेखरन ने कहा संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार जैसे नीजीकरण से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर लेगी, तो टाटा समूह निश्चित ही इसकी खरीद प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहेगा। दो विमानन कंपनियों सिंगापुर एयरलाइन्स और मलेशिया की एयर एशिया में टाटा समूह की पहले से हिस्सेदारी है। उन्होंने इस संभावित सौदे का अनुमान लगाने से इनकार करते हुए कहा कि इस बारे में फिलहाल कुछ भी कहना जल्द बाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि हम इस विमानन कंपनी के गंभीर खरीददारों में से हैं। 
 

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