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 95 लाख घोटाला करने वालों की जांच करने पहुंची भोपाल से टीम ,अंत्यावसायी योजना का मामला 

 95 लाख घोटाला करने वालों की जांच करने पहुंची भोपाल से टीम ,अंत्यावसायी योजना का मामला 

डिजिटल डेस्क, कटनी। अंत्यावसायी सहकारी समिति में घोटालेबाजों के कारनामों की जांच करने के लिए भोपाल से एक टीम कार्यालय पहुंची। तीन सदस्यीय टीम में इंदौर, पन्ना और खरगौन के अधिकारी शामिल रहे। कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यालय में दबिश देते हुए वे दस्तावेज चेक किए। जिस दस्तावेजों का सहारा लेकर यहां के सीईओ और बाबू बैंक अधिकारी से मिलकर करीब 95 लाख के फर्जीवाड़े को अंजाम दिए थे। यह घोटाला सबसे पहले एडीएम ने पकड़ा था। शिकायत के बाद जब जांच कराई गई, तो इसमें लाखों रुपए की गड़बड़ी सामने आई। जिस पर सीईओ और बाबू के साथ अन्य पर निलंबन की कार्यवाही की गई थी। इधर निलंबन के बाद अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

एक-एक दस्तावेज देखे कार्यालय में पहुंचने पर तीनों अधिकारी अलमारी में रखे एक-एक दस्तावेज देखे। जिस रजिस्टर में हितग्राहियों का नाम लिखा था, और जिस आवेदन पत्र के आधार पर वे हितग्राहियों को राशि दिए थे। उन सभी दस्तावेजों को खंगाला गया। इसके साथ कुछ हितग्राहियों को भी बुलाया गया। सूत्रों ने बताया कि विभागीय अधिकारी एडीएम की जांच रिपोर्ट भी देखे। हालांकि अगली कार्यवाही भोपाल से होनी है। जिसके बाद ही पता चल पाएगा कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के ऊपर आगे और कौन सी कड़ी कार्यवाही होती है।

फर्जीवाड़े पर एक नजर

यहां पर फर्जीवाड़ा फरवरी माह के अंतिम समय सामने आया था। दरअसल कलेक्ट्रेट से जब एक फोन गया। जिसमें हितग्राहियों से पूछा गया कि आपके नाम का लोन स्वीकृत करते हुए राशि बैंक में जमा करा दी गई है। इस कॉल से यहां के फर्जीवाड़ा सामने आया। जिसके बाद हितग्राहियों ने यह बताया कि उन्होंने लोन के लिए कोई आवेदन नहीं भरा था। एक दलाल उनके बीच जरुर पहुंचा था, जो यह कहा था कि शासन उन्हें स्वरोजगार के लिए दस से बीस हजार रुपए दे रही है। जिसके लिए उन्हें दस्तावेज देने पड़ेंगे। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे यहां के अधिकारियों ने मार्जिन मनी के नाम पर लाखों रुपए का खेल खेला।
 

बीच राह में फंसे हितग्राही
अधिकारी घोटाला करके चले गए। संबंधित बैंक अधिकारी भी इनकी राशि से मालामाल हो गया। लेकिन हितग्राही बीच राह में पिछले पांच माह से फंसे हुए
हैं। जिनके नाम से राशि बैंक में जमा की गई थी। उन हितग्राहियों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली, और ऊपर से पूछताछ के दौर से उन्हें गुजरना पड़ रहा है। जांच रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि नियमों के विपरीत जाकर विभाग के अधिकारियों ने राशि आहरण की। इतना ही नहीं राशि को तो व्यक्तिगत खाते में भी जमा कराया गया।
 

इनका कहना है
अंत्यावसायी सहकारी समिति की जांच करने के लिए भोपाल से टीम पहुंची थी। वर्तमान समय में यहां पर कोई अधिकारी और कर्मचारी नहीं है। जिसके लिए
आदिम जाति विभाग के जिला संयोजक को प्रभार दिया गया है।- एस.बी.सिंह, कलेक्टर
 

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