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कामेश्वर धाम काराे, जहां शिव ने खोला था अपना तीसरा नेत्र...

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 22nd, 2017 07:18 IST

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डिजिटल डेस्क, बलिया। आपने अब तक अनेक बार भगवान शिव के द्वारा कामदेव को भस्म करने की कथा अनेक बार सुनी होगी। पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है। आज हम आपको ऐसे ही एक स्थान की ओर लेकर जा रहे हैं, जिसके बारे में मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां भोलेनाथ ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को जलाकर भस्म कर दिया था। यह स्थान उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में है और कामेश्वर धाम काराे के नाम से प्रसिद्ध है। 

पेड़ के पीछे से छिपकर कामदेव ने चलाया बाण

इस स्थान के बारे में मान्यता है कि  शिव पुराण में कामदेव को भस्म करने वाली जिस जगह का वर्णन किया गया है यह वही है। यहां आज भी आम का एक पेड़ लगा हुआ है जो आधा जला है। कहा जाता है कि इसी पेड़ के पीछे से छिपकर कामदेव ने समाधि में लीन शिव पर अपना बाण छोड़ा था, जिसके बाद उनका तीसरा नेत्र खुल गया और कामदेव उसका भाजन बने। 

kameshwar Dham Karon Ballia U.P.

शांति के लिए यहां आए थे शिव

गंगा तमसा के इस पवित्र संगम  के इस धाम के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां सती के भस्मीभूत होने और शिव के तांडव के बाद जब विष्णुदेव सती के शरीर को खंड-खंड कर देते हैं तो शिव यहां आकर शांति के लिए युगों तक समाप्त ना होने वाली समाधि में लिन हो जाते हैं। 

राम का भी हुआ अागमन
वहीं त्रेतायुग में इस स्थान पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम लक्ष्मण का भी आगमन हुआ था। इसका उल्लेख बाल्मीकी रामायण में मिलता है। वहीं दुर्वासा ऋषि ने भी यहीं तप किया था। कामदेव से जुड़े होने की वजह से ही इसका नाम कामेश्वर काराे महादेव पड़ा। यह शिवालय रानी पोखरा के पूर्व तट पर विशाल आम के पेड़ के नीचे स्थित है। यह धाम काफी प्रसिद्ध है।

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