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 बाघिन अवनि प्रकरण: एनटीसीए की रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

December 06th, 2018 12:45 IST
 बाघिन अवनि प्रकरण: एनटीसीए की रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अवनि बाघिन की हत्या की जांच कर रही एनटीसीए  ने असगर अली के दावे को खारिज कर दिया है। बाघिन अवनि को 2 नवंबर को गोली मारी गई थी। शूटर आरोपी असगर ने दावा किया था कि  सेल्फ डिफेंस के लिए उसने गोली चलाई थी। मामले की जांच  कर रही दो सदस्यीय राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) समिति की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कमेटी ने यह कहते हुए  हैदराबाद के रहने वाले शार्पशूटर और अवनि की हत्या के आरोपी असगर अली खान के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने कहा था कि उसने सेल्फ डिफेंस में गोली चलाई थी। 2 नवंबर को बोराती में अवनि को गोली मारी गई थी।  मामले को गंभीरता से लेते हुए अवनि के शिकार की जांच के लिए दो सदस्यीय इस कमिटी का गठन 8 नवंबर को किया गया । कमेटी में रिटायर्ड मुख्य वन संरक्षक ओपी कालेर और एनजीओ वाइल्डलाइफ ट्रस्ट इंडिया के सदस्य जोस लूइस भी शामिल थे। कमेटी को उन परिस्थितियों का पता लगाने का काम सौंपा गया था, जिन परिस्थितियों में अवनि को मारा गया था। कमेटी ने बीते 27 नवंबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। 

आरोपी ने किया तीन कानूनों का उल्लंघन 
रिपोर्ट में सामने आया है कि किस तरह आरोपी असगर ने एक साथ तीन-तीन कानूनों का उल्लंघन किया था। असगर ने अवनि के शिकार में आर्म्स एक्ट 1958 की धारा 3 (1), इंडियन वेटेरिनरी काउंसिल ऐक्ट 1984, द वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन ऐक्ट 1972 के साथ एनटीसीए के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स का भी उल्लंघन किया गया था।  कमेटी ने रिपोर्ट को मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन और प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एके मिश्रा को भी भेजी है।  

आरोपी पर दर्ज होगा एफआईआर
एनटीसीए की रिपोर्ट के अनुसार, फॉरेस्टर मुखबिर शेख को सिर्फ अवनि की पहचान करने का काम दिया गया था, ना कि उस पर डार्ट चलाने का। रिपोर्ट के मुताबिक, 'हैरानी की बात है कि मुखबिर ने डार्ट में रखी 56 घंटे पुरानी दवा को अवनि पर इस्तेमाल किया, जबकि डार्ट में दवा को 24 घंटे से ज्यादा नहीं रखा जा सकता था।  अवनि पर डार्ट फायर करने के बाद जीप उसके पास गई थी, जिस पर उसने गुस्सा दिखाया जो स्वाभाविक था। 
 

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