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चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन होती है देवी चंद्रघंटा की पूजा, जानें विधि


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्री के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा होती है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से सुख-संपदा मिलती है और जीवन आनंदित होता है। चैत्र नवरात्रि 2019 में तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा आज सोमवार की जा रही है। मां चंद्रघंटा का रूप अत्यंत ही सौम्य होता है। मां चंद्रघंटा को सुगंध अत्यधिक प्रिय है। सिंह पर सवार माता के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्द्धचंद्र है, इसलिए माता को चंद्रघंटा नाम दिया गया है। मां चंद्रघंटा का शरीर सोने के समान कांतिवान है। उनकी दस भुजाएं हैं और दसों भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र हैं। कलश स्थापना के स्थान पर माता की पूजन का संकल्प लें।

ऐसा है इनका स्वरुप
भगवती चंद्रघंटा का रूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी माना गया है। इनका शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है, इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो कि विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की दिन विधि पूर्वक पूजा करने से भक्त को संसार में यश, कीर्ति और सम्मान प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार मान्यता यह भी है कि माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना से भक्तों को सभी जन्मों के कष्टों और पापों से मुक्त मिलती है।

कल्याण प्रदान करने वाली
माता चंद्रघंटा अपने सच्चे भक्तों को इसलोक और परलोक में कल्याण प्रदान करती है और भगवती अपने दोनों हाथो से साधकों को लम्बी आयु, सुख सम्पदा और रोगों से मुक्त होने का वरदान देती है। वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें।

पापों का नाश करने वाली
मां चंद्रघंटा अपने भक्तों के सभी पाप नष्ट कर देती हैं। मां चंद्रघंटा के आठ हाथों में कमल, धनुष-बाण, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र धारण किए हुए हैं। इनके कंठ में सफेद पुष्प की माला और रत्नजड़ित मुकुट शीर्ष पर विराजमान है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को असीम शांति और सुख सम्पदा का वरदान देती है। मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से भक्त के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसकी राह में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती है। इस देवी की पूजा करने से सभी दुखों और भय से मुक्ति मिलती है। 

आशीर्वाद से सुनाई देती हैं दिव्य ध्वनियां 
नवरात्रि के तीसरे दिन, श्रद्धालु का मन मणिपुर चक्र में प्रवेश करता है। इस स्थिति में, मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से भक्त अलौकिक और दैवीय चीजों को देखने में सक्षम होता है। और कई प्रकार की दिव्य ध्वनियां सुनने की क्षमता प्राप्त कर सकता है। लेकिन इस तीसरे दिन, और इस निश्चित स्थिति में भक्त को अत्यधिक अनुशासित और सावधान रहने की जरूरत है।

नीचे लिखे मंत्र से मां की पूजा करना श्रेयस्कर होता है –
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

ये मंत्र भी है श्रेयस्कर
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

नवरात्रि के तीसरे दिन के लिए मंत्रः
ॐ चं चं चं चंद्रघंटायेः हीं।
इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ है। इसके अलावा सफेद चीज का भोग जैसै दूध या खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है। मां चंद्रघंटा की पूजा में दूध का प्रयोग कल्याणकारी माना गया है। मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें। ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं।

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