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इस गलती से हुआ था टी बैग का आविष्कार 

BhaskarHindi.com | Last Modified - April 14th, 2018 13:22 IST

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डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। चाय पीने के शौकीन वैसे तो दुनिया भर में हैं, लेकिन बात अगर भारत की करें तो यहां के लोगों को तो बस मौका चाहिए चाय पीने का। ऐसा माना जाता है कि चाय चुटकियों में नींद दूर कर देती है। ऐसे में कामकाजी लोगों के लिए तो चाय एक रिफ्रेशमेन्ट ड्रिंक का काम करती है। आपने अक्सर देखा होगा कि रेस्टोरेंट या चाय की दुकानों में टी बैग भी उपलब्ध रहते हैं, मगर क्या आपने कभी सोचा है कि टी बैग कहां से चलन में आए? आइये हम आपको बताते हैं इसके पीछे की दिलचस्प कहानी।

बढ़ रही थी चाय की लोकप्रियता

18वीं शताब्दी में पहली बार ब्रिटेन की काली चाय ने लोकप्रियता के मामले में चीन की हरी चाय को पीछे छोड़ दिया था। उन्नीसवीं शताब्दी में भारत में चाय की खेती शुरू की गई। ब्रिटीश लोगों ने चीनी चाय के आयात को कम करने के लिए भारतीय चाय के आयात में बढ़ोतरी की। बीसवीं शताब्दी में एक और आविष्कार हुआ जिसने हमारी चाय पीने की आदत को पूरी तरह बदल दिया और वो है टी बैग।

ऐसे दुनिया के सामने आया टी बैग 

साल 1908 के आसपास, न्यूयॉर्क के चाय व्यापारी थॉमस सैलिवन ने अपने व्यापार को और बढ़ाने के लिए ग्राहकों को छोटे-छोटे रेशमी बैगों में चाय के नमूने भेजना शुरू किया। इन छोटे साइज के चाय के सैम्पल देखकर कुछ लोगों को लगा कि इस पैकेट में से चाय निकालने की बजाय इन्हें मेटल इन्फ्यूसर (धातु का एक बर्तन जिसमें चायपत्ती रखकर उबलते पानी में डाली जाती है) की तरह ही उबलते हुए पानी मे डाला जाता होगा। इसी तरह इन टी बैग्स का आविष्कार हुआ। 

दो आकार में बनाए गए टी बैग

1920 के दशक में टी बैग को बेचने के लिए तैयार किया गया और ये धीरे-धीरे ये अमेरिका में पॉपुलर हो गया। इन टी बैग्स को दो आकारों में बनाया गया। चाय के बड़े बर्तन के लिए एक बड़ा बैग और कप में डालने के लिए छोटा टी बैग।

दूसरे विश्य युद्ध से प्रभावित हुआ बाजार 

दूसरे विश्व युद्ध में बिगड़े आर्थिक हालात का असर इन टी बैग्स के बिजनेस पर भी पड़ा। ब्रिटेन में चाय की थैलियों पर रोक लगा दी गई और 1950 तक वो पूरी तरह बंद हो गए थे। साल 1953 में मशहूर चाय ब्रैंड टेटली ने ब्रिटेन में टी बैग्स को दोबारा बाजार में उतारा। इसी की देखादेखी बाकी कंपनियों ने भी जल्द ही टी बैग्स का प्रोडक्शन फिर शुरू कर दिया। 1960 के दशक के शुरुआती दिनों में चाय के बैग ब्रिटिश बाजार में 3 प्रतिशत से भी कम थे, लेकिन धीरे-धीरे इनमें बढ़ोतरी होने लगी। साल 2007 तक टी बैग ने ब्रिटेन के चाय बाजार के 96 प्रतिशत हिस्से 
पर कब्जा कर लिया था। 

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