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ट्रम्प और किम जोंग की मुलाकात पर बनी ये खूबसूरत कलाकृति

BhaskarHindi.com | Last Modified - June 12th, 2018 16:10 IST

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News Highlights

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-उन की सिंगापुर में हुई मुलाकात पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं।
  • देश-दुनिया में घट रहे कई मुद्दों पर रेत से कलाकृतियां बनाने वाले सुदर्शन पटनायक ने भी इस मुलाकात को पुरी के समुद्र तट की रेत पर उकेरा है।
  • सुदर्शन पटनायक ने दोनों देशों को शांति का संदेश देने के लिए ओडिशा के पुरी में ट्रम्प और किम जोंग की रेत पर छवि बनाकर अमेरिका-उत्तरी कोरिया शिखर सम्मेलन की सराहना की है।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-उन की सिंगापुर में हुई मुलाकात पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं। पूरे विश्व के मीडिया में इस ऐतिहासिक मुलाकात को बेहद तवज्जो दी जा रही है। देश-दुनिया में घट रहे कई मुद्दों पर रेत से कलाकृतियां बनाने वाले सुदर्शन पटनायक ने भी इस मुलाकात को पुरी के समुद्र तट की रेत पर उकेरा है। सुदर्शन पटनायक ने दोनों देशों को शांति का संदेश देने के लिए ओडिशा के पुरी में ट्रम्प और किम जोंग की रेत पर छवि बनाकर अमेरिका-उत्तरी कोरिया शिखर सम्मेलन की सराहना की है। दोनों नेताओं के चेहरे बनाने में लगभग चार टन रेत का इस्तेमाल किया गया है। पटनायक ने कहा कि उन्हें आशा है कि इस बैठक के नतीजे अच्छे होंगे और ये मुलाकात पूरी दुनिया में शांति का संदेश देगी।

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आसान नहीं रहा कलाकार बनने का सफर 

रेत से चेहरे बनाने की कला को नए आयाम देने वाले सुदर्शन पटनायक का जन्म 15 अप्रैल 1977 को ओडिशा के पुरी शहर में हुआ था। वो अपने परिवार में तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनका बचपन मुश्किलों से भरा हुआ था। पटनायक ने बचपन से ही खुद को सैंड आर्ट के प्रति समर्पित कर दिया था। रेत पर आकृतियां बनाने की उनकी ये कला देखते ही देखते दुनिया भर में मशहूर हो गई। साल 2014 में सुदर्शन को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 

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अपनी इस कला से जीते कई सारे पुरस्कार 

सुदर्शन ने दुनिया भर में 50 से ज्यादा इंटरनेशनल अवार्ड्स जीते हैं। इतना ही नहीं सुदर्शन ने लगभग 27 चैम्पियनशिप जीतकर देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। साल 2013 के दौरान उन्होंने रूस में हुई 12 वीं अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्ट प्रतियोगिता में भाग लिया और सेंट पीटर्सबर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 

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कई मुद्दों को अपनी कला से दी आवाज   

उन्होंने सात साल की उम्र से रेत पर छवियां बनानी शुरू कर दी थी। उन्होंनें बचपन से ही सैकड़ों कलाकृतियां तैयार की है। सुदर्शन ने भारत में गोल्डन सैंड आर्ट संस्थान" की स्थापना की, जो भारत का अपनी तरह का सबसे पहला संस्थान है। वो कई मुद्दों पर रेत से कलाकृतियां बनाते हैं जैसे पर्यावरण संकट, त्यौहार और राष्ट्रीय अखंडता। सुदर्शन नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के ब्रांड एंबेसडर भी रह चुके हैं।

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इस तरह से मिली अंतर्राष्ट्रीय पहचान 

उनकी इस कला को दुनिया भर में पहचान तब मिली जब उन्होंने रेत की मदद से ब्लैक ताजमहल तैयार किया था। सुदर्शन ने अपने रचनात्मक डिजाइनों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं और अपना नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज कराया है।

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