comScore

14 जून मनाया गया शुक्रप्रदोष, जानिए कैसे करें शिव जी की पूजा


डिजिटल डेस्क। हर माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत किया जाता है, जो कि 14 जून को मनाया गया। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन होने से प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष या भगुवारा प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत अच्छा भाग्य और दंपत्ति की खुशियों को बनाए रखने के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। 

ज्योतिष के अनुसार त्रयोदशी तिथि पूरा एक दिन पार करके अगले दिन हो तो प्रदोष व्रत उस दिन किया जाता है, जिस दिन प्रदोष काल होता है। प्रदोष काल रात्रि के प्रथम प्रहर, यानि सूर्यास्त के तुरंत बाद के समय को कहते हैं। 

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त के बाद रात्रि के प्रथम प्रहर में भगवान शिव की पूजा का विधान है। आज के दिन सूर्यास्त शाम 07 बजकर 20 मिनट पर होगा।

पूजा विधि
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन व्रती को प्रात:काल उठकर नित्य क्रम से निवृत हो स्नान कर शिव जी का पूजन करना चाहिए। पूरे दिन मन ही मन “ॐ नम: शिवाय ” का जप करें। पूरे दिन निराहार रहें। त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में यानी सुर्यास्त से तीन घड़ी पूर्व, शिव जी का पूजन करना चाहिए। शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा संध्या काल 4:30 बजे से लेकर संध्या 7:00 बजे के बीच की जाती है।

संध्या काल में पुन: स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें । पूजा स्थल अथवा पूजा गृह को शुद्ध कर लें। यदि व्रती चाहे तो शिव मंदिर में भी जा कर पूजा कर सकते हैं। पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। पूजन की सभी सामग्री एकत्रित कर लें। कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें। कुश के आसन पर बैठ कर शिव जी की पूजा विधि-विधान से करें। “ऊँ नम: शिवाय ” कहते हुए शिव जी को जल अर्पित करें।

कमेंट करें
1kEuW