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चैनल का पैकेज चुनने मिली 31 मई तक मोहलत

चैनल का पैकेज चुनने मिली 31 मई तक मोहलत

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अपनी रुचि के मुताबिक चैनल चुनकर भुगतान करने के लिए निर्धारित 31 मार्च की डेडलाइन को बढ़ा कर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ने 31 मई कर दिया है। तब तक उपभोक्ता बेस्ट प्लान के जरिए अपना केबल टीवी शुरू रख सकते हैं। केबल ऑपरेटरों की मानें तो शहर में अब तक 55 से 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने पैकेज सिलेक्शन कर लिया है। शेष अभी तक बेस्ट प्लान पर आश्रित हैं, वहीं हाल ही में शुरू हुए आईपीएल मैच प्रसारण और लोकसभा चुनावों की कवरेज के कारण उपभोक्ताओं का केबल टीवी की ओर रुझान बढ़ा है। आईपीएल शुरू होने के बाद से कई उपभोक्ताओं ने पैकेज सिलेक्शन को प्राथमिकता दी है। ऐसे में अब उन्हें जो दो अतिरिक्त महीनों का वक्त मिला है, इसमें शेष 40 प्रतिशत उपभोक्ता भी पैकेज सिलेक्शन कर लेंगे, उन्हें ऐसी उम्मीद है।

कंज्यूमर के लिए ये भी सुविधा
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के नए नियम से ग्राहकों को अपनी पसंद के टीवी चैनलों को सब्सक्राइब करने की छूट मिली है। यह नियम 1 फरवरी से लागू हो चुका था। केबल ऑपरेटरों को उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या देखते हुए 31 मार्च  तक समय दिया गया था। केबल ऑपरेटरों के पास मौजूद मानव बल और विशाल उपभोक्ता संख्या देखते हुए ट्राई ने यह छूट दी थी। एमएसओ का दावा है कि ग्रुप्स, उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। कोई अगर चाहे, तो इसके अलग भी चैनल ले सकता है।  अब इस डेडलाइन को 31 मई तक बढ़ाया गया है। 

प्लान के आधार पर सेवा
एमएसओ के अनुसार समय सीमा सिर्फ सेवा शुरू करने की बढ़ाई गई है। इस दौरान चैनलों का मूल्य नई एमआरपी दर के अनुसार होगा। इसलिए जिन उपभोक्ताओं ने अब तक चैनलों का चुनाव नहीं किया है, उनके लिए वर्तमान शुल्क के अनुसार बेस्ट प्लान के तहत सेवा जारी रखी गई है।

क्या कहते हैं ऑपरेटर
नागपुर डिस्ट्रिक्ट केबल एसोशिएशन अब भी ट्राई के नए नियम के खिलाफ है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष बांते ने दैनिक भास्कर से कहा कि ट्राई ने डेडलाइन बढ़ाई है, तो इस बीच नए उपभोक्ता पैकेज चयन करेंगे ही, लेकिन एसोसिएशन अभी भी इसी मत पर कायम है कि इस नए नियम को बेवजह लागू किया जा रहा है। पूर्व में जहां 300 रुपए में उपभोक्ता कई प्रकार के चैनल देख सकते थे, अब उसके लिए 500 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। नया नियम उन राज्यों के लिए कारगर है, जहां एक ही भाषा चलती है। महाराष्ट्र में मराठी, हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाई चैनलों की डिमांड है। 

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