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मंगल का शुभ - अशुभ फल एवं उपाय

BhaskarHindi.com | Last Modified - April 17th, 2018 11:59 IST

डिजिटल डेस्क, भोपाल। नवग्रहों में मंगल को सेनापति का पद मिला हुआ है। यह बल, पराक्रम और पुरुषत्व का प्रमुख कारक ग्रह है। मंगल कुंडली के तीसरे और छठवें भाव और छोटे भाई का कारक है। मंगल का मेष और वृश्चिक राशि पर अधिकार होता है। मेष राशि में यह मूलत्रिकोण बली होता है और वृश्चिक राशि में स्वराशि जितना बल पाता है मतलब मूलत्रिकोण राशि से कुछ कम बल प्राप्त करता है। जिन जातकों की कुण्डली में मंगल मजबूत और शुभ प्रभाव लिए होता है ऐसे जातक निडर और साहसी होते हैं। भूमि, मकान का अच्छा सुख मंगल की शुभ और बली स्थिति प्रदान करती है। कुंडली के बली चौथे भाव या बली चतुर्थे भाव से बली मंगल का संबंध अच्छा मकान सुख देने वाला होता है। पुलिस, मिलिट्री, सेना जैसी जॉब में उच्च पद इसी मंगल के शुभ प्रभाव से मिलता है।

मंगल का शुभ-अशुभ फल

  • स्त्रियों की कुंडली में ये मांगल्य का कारक है, संतान आदि के संबंध में भी गुरु की तरह स्त्रियों की कुंडली में मंगल से भी विचार किया जाता है।
     
  • कुंडली के 10वें भाव में यह दिग्बल प्राप्त कर शुभ फल देने वाला होता है यह ग्रह एक तरह से योगकारक होता है। कर्क लग्न में पंचमेश और दशमेश होकर और सिंह लग्न में चतुर्थेश, नवमेश केन्द्रेश त्रिकोणेश होकर प्रबल योगकारी और शुभ फल देने वाला होता है।
     
  • सहन शक्ति का कारक भी यही है, जिन जातकों का मंगल अशुभ होता है वो कायरों की तरह व्यवहार करते हैं। साहस और पराक्रम की ऐसे जातकों में कमी रहती है।
     
  • मेष, कर्क, सिंह, धनु, मीन लग्न में इसकी मजबूत और शुभ स्थिति होना लग्न की कुंडलियों के लिए आवश्यक होता है। केंद्र त्रिकोण भाव में यह अपनी उच्च राशि मकर, मूलत्रिकोण राशि मेष और स्वराशि वृश्चिक में होने पर रोचक नाम का बहुत सुंदर योग बनाता है। जिसके फल राजयोग के समान होते हैं कुण्डली के अन्य ग्रह और योग शुभ होने से रूचक योग की शुभता और ज्यादा बढ़ जाती है।
     
  • मंगल ग्रह शरीर में खून, मांस, बल आदि का कारक है। 
     
 
  • जिस जातक के लग्न में मंगल होता है ऐसे जातकों का चेहरा लालिमा लिए हुए होता है, ऐसे जातकों की शारीरिक स्थिति भी मजबूत होती है। ये ग्रह चंद्र के साथ मंगल का लक्ष्मी योग बनाता है जिसके प्रभाव से मंगल के शुभ फलो में और ज्यादा वृद्धि हो जाती है। 
     
  • चंद्र के बाद सूर्य गुरू के साथ इसका सम्बन्ध बहुत ही शुभ रहता है, उच्च अधिकारी बनने के लिए मंगल के साथ गुरू-सूर्य का संबंध दशम भाव से होने पर सफलता प्रदान करता है।
     
  • शुक्र बुध के साथ इसका संबंध सम रहता है तो शनि, राहु, केतु के साथ संबंध होने पर मंगल के फल नेगेटिव हो जाते हैं।
     
  • शनि के साथ मंगल का संबंध होने पर अशुभ विस्फोटक योग बनाता है तो राहु केतु के साथ अंगारक योग।
     
  • मंगल की शुभता में वृद्धि करने के लिए तांबे का कड़ा, तांबे की अंगूठी, पहनना इसके शुभ प्रभाव में वृद्धि करता है।
     
  • मेष, कर्क, सिंह, मीन लग्न में मूंगा पहनना मंगल की शुभता और बल में वृद्धि के लिए शुभ फल देने वाला होता है।
     
  • नीच ग्रह का रत्न कभी भी नहीं पहनना चाहिए यदि वह योगकारी होकर भी नीच है तब भी ऐसे ग्रह का रत्न पहनना कभी शुभफल देने वाला नहीं होता।

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