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यूनिवर्सिटी ने साफतौर पर कहा- RSS इतिहास का भाग, अध्याय नहीं हटाएंगे

यूनिवर्सिटी ने साफतौर पर कहा- RSS इतिहास का भाग, अध्याय नहीं हटाएंगे

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  बीए द्वितीय वर्ष के इतिहास विषय में ‘संघ की राष्ट्रनिर्माण में भूमिका’ अध्याय जोड़ने के फैसले पर राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय कायम है। यूनिवर्सिटी कुलगुरु डॉ. सिद्धार्थविनायक काणे ने भास्कर से बातचीत में साफ किया है कि यह अध्याय जोड़ कर यूनिवर्सिटी ने कोई गलती नहीं की है, ऐसे में इसे हटाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। 

कुलगुरु काणे ने कहा कि केवल नागपुर विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी, मुंबई यूनिवर्सिटी, बर्दवान यूनिवर्सिटी, बामू यूनिवर्सिटी और भी कई विश्वविद्यालयों पाठ्यक्रम में भी यह अध्याय पढ़ाया जा रहा है। क्योंकि आरएसएस भारत के इतिहास का हिस्सा है।  अगर हटाना ही है, तो केवल नागपुर यूनिवर्सिटी ही क्यों, इन सभी विश्वविद्यालयों से यह अध्याय हटाने की मांग करनी चाहिए। जब अन्य यूनिवर्सिटी में इस अध्याय का विरोध नहीं है तो नागपुर में इसका विरोध होने पर उन्होंने सवाल किए। शिक्षण मंच और भाजपा के दबाव में अध्याय जोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए डॉ. काणे ने कहा कि नई बोर्ड ऑफ स्टडीज को बने एक साल भी पूरा होने का है। जबकि वर्ष 2003 में पीजी में यह अध्याय पहले से था, तब कौन सा शिक्षण मंच था? तब विरोध क्यों नहीं हुआ? विरोध करने वाले ये क्यों नहीं देखते कि आरएसएस के अध्याय के साथ हमने इंडियन नेशनल कांग्रेस पर केंद्रित अध्याय भी पाठ्यक्रम में जोड़ा है। विरोध करने वाले जानते ही नहीं कि वाकई में विषय क्या है। 

यूनिवर्सिटी के फैसले का विरोध

यूनिवर्सिटी के इस फैसले पर विरोध जताते हुए एनएसयूआई और राष्ट्रवादी विद्यार्थी कांग्रेस ने लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों ने सिविल लाइंस स्थित यूनिवर्सिटी  के प्रशासकीय परिसर के बाहर कुलगुरु डॉ. सिद्धार्थविनायक काणे का पुतला जलाया। इस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शैलेंद्र तिवारी, राविकां प्रदेश सचिव राहुल पाण्डेय, अध्यक्ष रवि पराते, कार्याध्यक्ष रुद्र धाकड़े, राहुल वाघमारे, अमोल पालपल्लीवार,  एनएसयूआई से अजीत सिंह, अभिषेक सिंह और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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