comScore

J&K: UNSC में चीन-पाक की कोशिश विफल, रूस आया भारत के साथ

J&K: UNSC में चीन-पाक की कोशिश विफल, रूस आया भारत के साथ

हाईलाइट

  • J&L से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहुंच गया है
  • चीन की मांग पर इस मामले को लेकर अनऔपचारिक बैठक हो रही है
  • रूस इस मामले पर भारत के पक्ष मे है

डिजिटल डेस्क, न्यू यॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को घेरने की चीन-पाक की कोशिश विफल हो गई है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मामले को लेकर चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) पहुंचा था। जिसके बाद शुक्रवार को चीन की मांग पर इस मामले को लेकर अनऔपचारिक बैठक हुई।

बैठक के बाद चीनी राजदूत ने कहा कि भारत ने जो संवैधानिक संशोधन किया है उससे मौजूदा स्थिति बदल गई है। कश्मीर में हालात चिंताजनक हैं। चीन ने भारत की कार्रवाई को अवैध बताया और कहा कि कोई भी पक्ष एकतरफा कार्रवाई न करें। 

भारत इस बैठक के नतीजे को लेकर पहले से ही पूरी तरह बेफिक्र नजर आ रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि रूस भारत के साथ मजबूती के साथ खड़ा था। वहीं अमेरिका और खुद संयुक्त राष्ट्र भी इस मामले में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था।

पाकिस्तान की गुहार पर चीन ने सिक्यॉरिटी काउंसिल के मौजूदा अध्यक्ष पोलैंड से पाकिस्तानी प्रतिनिधि की मौजूदगी में काउंसिल की औपचारिक मीटिंग की मांग की थी, लेकिन वह सदस्य देशों की सहमति नहीं जुटा पाया। इसलिए, चीन की पहल पर बंद कमरे में एक अनौपचारिक मीटिंग भर हुई।

यूएनएससी को लिखे पत्र में पाकिस्तान ने अनुरोध किया था कि उसके प्रतिनिधि को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के प्रावधानों के अनुसार बैठक में भाग लेने की अनुमति दी जाए, लेकिन उसे अनुमति नहीं मिली। 

इस बैठक में केवल पांच स्थायी सदस्यों और 10 गैर-स्थायी सदस्यों को एंट्री की अनुमति है। यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। 10 गैर-स्थायी सदस्य बेल्जियम, कोट डीवोएर, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वेटोरियल गुनिया, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका हैं।

बता दें कि 5 अगस्त को भारत ने अनुच्छेद 370 को खत्म करते हुए जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को खत्म कर दिया था। भारत के इस फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने इस मामले को लेकर कहा था कि वह हर प्लैटफॉर्म पर कश्मीर मुद्दा उठाएगा।

हालांकि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से कहा था कि यह उसका आंतरिक मामला है। भारत ने पाकिस्तान को वास्तविकता स्वीकार करने की सलाह भी दी थी। जम्मू-कश्मीर को लेकर आखिरी औपचारिक या फुल मीटिंग 1965 में हुई थी।

कमेंट करें
v2u4G