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दिल जंगली के ट्रेलर में एक्ट्रेस ललिता पवार का उड़ाया मजाक, काणी बोलने पर भड़के रंजीत

September 06th, 2018 15:43 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई। फिल्म 'दिल जंगली' के ट्रेलर में 80 के दशक के सीरियल 'रामायण' में मंथरा का किरदार निभाने वालीं वेटरन एक्ट्रेस ललिता पवार का मजाक उड़ाया गया है। हाल ही में फिल्म 'दिल जंगली' ट्रेलर रिलीज किया गया था। ट्रेलर में एक एक्टर अपनी को-एक्टर से कहता है - 'दिल से आपको कहना चाहता हूं, आप न वो एक्ट्रेस जैसी लगती हो बिल्कुल', एक्ट्रेस पूछती है, जेनिफर लोपेज?', एक्टर जवाब देता है - 'न न न न, ललिता पवार ... काणी!' ट्रेलर में अभिनेत्री ललिता पवार का अपमान करने वाला डायलॉग शामिल करने पर फेमस खलनायक रंजीतने इसकी जमकर आलोचना की है।

रंजीत ने की आलोचना 

अभिनेता रंजीत ने कहा है, "ऐसा बोलने वाले कौन हैं, उन्हें पकड़ना चाहिए। ललिता जी जैसे सीनियर, ग्रेट एक्टर्स का सम्मान किया जाना चाहिए। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।" खराब बोलने या किसी और पर लांछन लगाने से फिल्में नहीं चलतीं। नामी-गिरामी, फिल्मी परिवार की तरफ से बनाई गई फिल्म में ऐसा होना शर्म की बात है। स्टैंडर्ड बहुत गिर गया है। अब काम करने में भी हमें शर्म आती है।"

सेंसर बोर्ड भी नहीं देता ध्यान 

अभिनेत्री ललिता जी की अगर आंख खराब भी हो गई थी तो क्या हुआ? सैकड़ों फिल्मों में उन्होंने शानदार अभिनय किया, फिर दिव्यांग होना कौन-सा गुनाह है। सेंसर बोर्ड भी ध्यान नहीं देता। वहां भी सिफारिशी लोग भरे पड़े हैं, स्पेशलिस्ट्स नहीं हैं।"

'कांणी' संबोधन अभद्र 

कांणी अभद्र संबोधन है, जो कुछ लोग एक आंख से दृष्टिहीन व्यक्ति के लिए इस्तेमाल करते हैं। अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री के लिए ऐसा संबोधन इस्तेमाल करने के पीछे क्या वजह है, ये जानने के लिए निर्माता जैकी भगनानी और दीपशिखा देशमुख से संपर्क साधने की कोशिश की गई, वहीं सेंसर बोर्ड प्रमुख प्रसून जोशी का पक्ष जानने के लिए संदेश भेजा गया, लेकिन किसी ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी। 

अभिनेत्री ललिता पवार का फ़िल्मी सफर 

अपनी कुटिल मुस्कान और पैंतरे वाली चाल के लिए पूरे सिनेमा जगत में मशहूर ललिता पवार ने 9 साल की उम्र में 1928 में फिल्म राजा हरिश्चंद्र से अपना करियर शुरू किया था। वे 1940 के दशक में बनने वाली कई मूक फिल्मों की मुख्य नायिका भी रहीं। उन्होंने अनाड़ी, श्री 420 और मिस्टर एंड मिसेज 55 में एक्टिंग के लिए खासी तारीफ बटोरी। पूरे जीवनकाल में उन्होंने 700 से अधिक मराठी फिल्मों में काम किया। साल 1942 में शूटिंग के दौरान हुए हादसे की वजह से उनके चेहरे के एक हिस्से में पैरालिसिस अटैक के दायरे में आ गया था, और इसकी वजह से बाईं आंख में भी दिक्कत पैदा हुई और धीरे-धीरे वही उनकी पहचान बन गई। 

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