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लंदन: विजय माल्या प्रत्यर्पण केस की सुनवाई रही बेनतीजा, बढ़ी जमानत

September 06th, 2018 15:29 IST

डिजिटल डेस्क, लंदन। भारतीय बैंकों से 9 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर लंदन भाग चुके शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई बेनतीजा रही। लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोई नतीजा ही नहीं निकला। जिसके बाद विजय माल्या की जमानत को 2 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। कोर्ट में बचाव पक्ष अपनी दलीलें पूरी नहीं कर पाया। बचाव पक्ष भारत सरकार के सबूतों के विरुद्ध अपनी दलीलें पेश करना चाह रहा था। 

ब्रिटेन की सरकार से सहयोग की मांग

कोर्ट में मामले की बहस पूरी नहीं होने की वजह से सुनवाई को फिर से आगे की तारीख के लिए टाल दिया गया है। अब अगली सुनवाई में कोर्ट माल्या पर फैसला सुना सकता है। हालांकि अभी अगली सुनवाई के लिए तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन संभावना है कि 3 हफ्ते के अंदर अगली तारीख तय हो जाएगी। भारत ने माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन से मदद की मांग की थी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ चल रहे प्रत्यर्पण के मामले में ब्रिटेन की सरकार से सहयोग की मांग की गई है। 

द्विपक्षीय बैठक में की गई मांग

जानकारी के अनुसार, रिजीजू ने ब्रिटेन के सुरक्षा व आर्थिक अपराध मामलों के मंत्री बेन वॉलेस के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में रिजीजू को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में माल्या की चल रही सुनवाई के बारे में अवगत कराया गया। इस बैठक में मौजूद अधिकारी ने बताया कि रिजीजू ने विजय माल्या, क्रिकेट बूकी संजीव कपूर, ललित मोदी समेत 13 लोगों के प्रत्यर्पण में मदद की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि कश्मीरी या खालिस्तानी अलगाववादियों द्वारा ब्रिटेन की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं किया जाए। 

कोर्ट में सबूतों को खारिज करने की कोशिश
 
उल्लेखनीय है कि मामले में अंतिम सुनवाईयों के लिए माल्या लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में लौटेंगे। सुनवाई के दौरान माल्या के वकील ने सारे सबूतों को खारिज करवाने की कोशिश की। इस सुनवाई के दौरान माल्या के वकील ने बचाव में कहा कि ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भारत के कोई भी सबूत स्वीकार करने लायक नहीं है। हालांकि, इस मामले में प्रोसिक्यूशन यानी भारत सरकार की ओर से क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (CPS) का पक्ष रखना बाकी है।

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