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केन्द्रीय संस्थानों में मजदूरों को दिया जा रहा पुराना मेहनताना

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 05th, 2018 13:44 IST

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केन्द्रीय संस्थानों में मजदूरों को दिया जा रहा पुराना मेहनताना

डिजिटल डेस्क, नागपुर। केंद्र सरकार ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम करनेवाले कुशल, अर्धकुशल व अकुशल मजदूरों का मेहनताना तय किया है, पर केंद्रीय संस्थानों में आउटसोर्सिंग पर रखे मजदूरों को सरकार द्वारा तय मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। केंद्रीय श्रम उपआयुक्तालय की आेर से इस दिशा में कदम तो उठाए गए, लेकिन पुराने करार का हवाला देकर मजदूरों को पुराने रेट से ही मेहनताना दिया जा रहा है। पुराना रेट 300 से 400 रुपए के आस-पास है। इनकम टैक्स विभाग में मजदूरों का यही रोना है। 

जेब से पैसे देने ठेकेदार तैयार नहीं 
केंद्रीय विभागों, संस्थानों व केंद्र सरकार के उपक्रमों में आउटसोर्सिंग पर काम करनेवाले मजदूरों को 400 से 550 रुपए तक का हर दिन मेहनताना मिलना चाहिए। रीजनल श्रम उपआयुक्तालय (सेंट्रल) की आेर से ऐसे संस्थानों की जांच करने पर खुलासा हुआ कि इन्हें पुराने दर पर ही मेहनताना दिया जा रहा है। आयुक्तालय की आेर से संबंधित ठेकेदार से रिपोर्ट मांगी गई। आयुक्तालय ने संबंधित ठेकेदार को नए रेट से मेहनताना देने के निर्देश भी दिए, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। दरअसल, ठेकेदारों ने बढे़ हुए रेट के अनुसार भुगतान करने की गुजारिश संबंधित विभागों से की। संबंधित विभागों ने करार नया रेट लागू होने के पूर्व का होने का हवाला देकर नए रेट से भुगतान करने से इनकार कर दिया। ठेकेदार भी अपनी जेब से मजदूरों को अतिरिक्त मेहनताना देने को तैयार नहीं है। 

कोर्ट में चुनौती भी दी गई
रेलवे, सेंट्रल जीएसटी, नया सचिवालय, सीजीआे व केंद्रीय उपक्रमों में मजदूरों को पुराने दर पर ही मेहनताना दिया जा रहा है। कुछ मामलों में आयुक्तालय के निर्देशों को कोर्ट में चुनौती दी गई। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने से केंद्रीय श्रम आयुक्तालय कुछ नहीं कर सकता। इन मजदूरों में सबसे ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड, हाउस कीपिंग (सफाई) व ड्राइवर शामिल हैं। 

जांच पड़ताल में खुलासा हुआ 
केंद्रीय विभागों में जांच-पड़ताल करने पर इसका खुलासा हुआ कि मजदूरों को नए रेट से मेहनताना नहीं मिल रहा। इस संबंध में ठेकेदार व संबंधित संस्था से रिपोर्ट तलब की गई। नए रेट से मेहनताना देने के निर्देश दिए, लेकिन इसे कोर्ट में चुनौती दी गई। करार नया रेट लागू होने के पूर्व का होने का कारण बताया गया। इसीतरह नया करार करने पर नए रेट से मेहनताना देने का भरोसा दिया गया है। संबंधित मामले कोर्ट में विचाराधीन है।  -रीजनल श्रम उप मुख्य उपायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय नागपुर

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