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क्या है श्री यंत्र, कैसे करें इसका उपयोग ?

March 09th, 2018 14:09 IST

डिजिटल डेस्क । मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे कारगर मंत्र है श्री यंत्र। श्री का अर्थ होता है लक्ष्मी। इस नाम से ही स्पष्ट है कि ये लक्ष्मी माता का यंत्र है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में श्री यंत्र की श्रद्धाभाव से नियमित पूजा होती है उस घर में निरंतर धन समृद्धि बढ़ती रहती है। श्री यंत्र की पूजा करें या लक्ष्मी की मतलब एक ही है। माना जाता है कि श्री यंत्र में लक्ष्मी की आत्मा और शक्ति समाहित है।

कितना शक्तिशाली है श्री यंत्र ?

माना जाता है कि सोने का श्री यंत्र हमेशा प्रभावशाली रहता है। जबकि चांदी का श्री यंत्र 11 साल तक असरकारी होता है। तांबे से बने श्री यंत्र की शक्ति दो साल बाद समाप्त हो जाती है।

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कैसे करें श्री यंत्र की स्थापना ?

श्री यंत्र का निर्माण सिद्ध मुहूर्त में ही किया जाता है। गुरुपुष्य योग, रविपुष्य योग, नवरात्रि, धन-त्रयोदशी, दीपावली, शिवरात्रि, अक्षय तृतीया आदि श्री यंत्रनिर्माण और स्थापन के श्रेष्ठ मुहूर्त हैं।

अपने घर में किसी भी श्रेष्ठ मुहूर्त में श्री यंत्र को स्थापित किया जा सकता है। किसी भी बुधवार को प्रातः श्री यंत्र को स्थापित किया जा सकता है।

श्री यंत्र की स्थापना का विधान बहुत ही सरल है, शास्त्रों के अनुसार श्री यंत्र की रोज पूजा आवश्यक नहीं है और न ही रोज जल से स्नान आदि कराने की जरूरत है। 

श्री यंत्र पर फूल, इत्र आदि चढ़ाना चाहिये और रोज इसके सामने अगरबत्ती व दीपक जला देना चाहिए। 

यदि किसी दिन श्री यंत्र की पूजा नहीं भी होती या इसके सामने अगरबत्ती व दीपक नहीं भी जलाया जाता, तब भी इसके प्रभाव में कोई कमी नहीं आती।

शुभ अवसरों पर श्री यंत्र की पूजा का विधान है जैसे अक्षय तृतीया, नवरात्रि, धन-त्रयोदशी, दीपावली, आंवला नवमी आदि श्रेष्ठ दिवसों पर श्री यंत्र की पूजा की जाती है।

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श्री यंत्र की प्रचलित कथा

एक बार मां लक्ष्मी पृथ्वीवासियों से रूठकर बैकुंठ चली गई थीं तो उनके धरती छोड़कर चले जाने से धरती पर आकाल और दरिद्रता का साम्राज्य हो गया था। पाप प्रवृत्ति बढ़ गयी थी। इस स्थिति को देखकर वशिष्ठ मुनि तपस्या में लीन हो गए। विशिष्ठ मुनि की तपस्या देखकर विष्णु भगवान ने देवी लक्ष्मी से पृथ्वीवासियों को क्षमा करके उन पर कृपा करने का अनुरोध किया, लेकिन देवी लक्ष्मी नहीं मानी। तब गुरू बृहस्पति ने वशिष्ठ मुनि से कहा कि अब एक ही उपाय है कि श्री यंत्र की स्थापना करके इसकी पूजा की जाए। गुरू बृहस्पति के नेतृत्व में श्री यंत्र का निर्माण शुरू हुआ और धनतेरस के दिन इसकी स्थापना करके विधिवत पूजा होने लगी। देवी लक्ष्मी दीपावली के दिन प्रकट हुई और कहने लगी। श्री यंत्र की पूजा के कारण मुझे विवश होकर आना पड़ा। अब मैं आप सभी से प्रसन्न हूं, पृथ्वीवासी अब मेरी कृपा से धन समृद्धि प्राप्त कर सकेंगे।

इस यंत्र का बखान दुर्गा सप्तशती में भी किया गया है। मान्यता है कि यह यंत्र मां त्रिपुरसुंदरी का आराधना स्थल है। यह चक्र ही उनका निवास एवं रथ है। यह ऐसा समर्थ यंत्र है कि इसमें समस्त देवों की आराधना-उपासना की जा सकती है। सभी वर्ण संप्रदाय का मान्य एवं आराध्य है।

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