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भारतीयों की अच्छी नींद का दुश्मन कौन ?

September 03rd, 2018 09:45 IST

डिजिटल डेस्क। नई तकनीक ने दुनिया को एक मुट्ठी में समेट दिया है। लेकिन भारतीयों में इन टेक्नोलॉजी के प्रति लगाव हद से ज्यादा बढ़ता जा रहा है। और यही कारण है कि भारतीय लोग अच्छी नींद नहीं ले पा रहे हैं। ज्यादातर भारतीय गहरी नींद की जगह एक्सरसाइज को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं मोबाइल - लैपटॉप का अंधेरे में इस्तेमाल देश में अंधेपन को भी बढ़ा रहा है।  

क्या कहता है फिलिप्स का ग्लोबल सर्वे 


फिलिप्स के ग्लोबल सर्वे के मुताबिक 32 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि तकनीक के आधुनिक उपकरणों, मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की वजह से वह गहरी नींद नहीं ले पाते हैं। जबकि 19 फीसदी लोग अपने काम के घंटों को नींद में रुकावट मानते हैं।

‘नींद को कम प्राथमिकता दे रहे भारतीय’ 


सर्वे में बताया गया है कि 66 फीसदी भारतीय यह महसूस करते हैं कि नींद से ज्यादा एक्सरसाइज उन्हें फिट रख सकती है। सर्वे के अनुसार 45 प्रतिशत भारतीय अच्छी नींद के लिए मेडिटेशन को अपनाते हैं। जबकि 24 फीसदी भारतीय विशेष ढंग से सोने का विकल्प पसंद करते हैं। 

अंधेरे में न करें मोबाइल का इस्तेमाल 


ज्यादातर लोग अंधेरे में बैठकर मोबाइल या लैपटॉप चलाना पसंद करते हैं। लेकिन शायद आपको नहीं पता, अंधेरे में मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल आंखें खराब कर सकता है।   
चिंता की वजह से नहीं आती नींद 


अनिद्रा ने विश्व स्तर पर 26 फीसदी लोगों को प्रभावित किया है, जबकि खर्राटों ने 21 फीसदी प्रतिवादियों को जगाए रखा। मन में चिंता (58 फीसदी) और टेक्नॉलजी की ओर से फैलाई गई गड़बड़ियों से अच्छी नींद में बाधा पड़ती है। 36 फीसदी लोग अच्छी नींद के लिए म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं। इसके अलावा 32 फीसदी लोग जागने और सोने का शेड्यूल फॉलो करते हैं।

13 देशों के लोगों के बीच हुआ सर्वे

सर्वे में 13 देशों के 15 हजार वयस्कों को शामिल किया गया था। इन देशों में अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, पोलैंड, चीन और भारत समेत अन्य देश शामिल थे। अच्छी नींद न आने से ग्लोबल स्तर पर 46 फीसदी लोग थकावट महसूस करते हैं। 41 फीसदी भारतीय चिड़चिड़ा बर्ताव करते हैं। 39 फीसदी लोगों में मोटिवेशन की कमी होती है और 39 फीसदी लोगों का ध्यान एकाग्र नहीं हो पाता है।
 

नींद न आने की समस्या से पीड़ित हैं 10 करोड़ लोग 

सर्वे के अनुसार अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद लेना बेहद आवश्यक है। विश्व स्तर पर 10 करोड़ लोग अच्छी नींद न आने की बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें से 80 फीसदी लोगों ने इस बीमारी का इलाज नहीं कराया, जबकि 30 प्रतिशत लोगों को नींद काफी मुश्किल से आती है।
 

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