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4 महीने के निचले स्तर पर थोक महंगाई दर, जुलाई के 5.09% के मुकाबले रही 4.53%

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 14th, 2018 21:16 IST

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4 महीने के निचले स्तर पर थोक महंगाई दर, जुलाई के 5.09% के मुकाबले रही 4.53%

News Highlights

  • थोक महंगाई दर के अगस्त माह के आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए।
  • अगस्त में थोक महंगाई दर (WPI) 4.53% रही, जो कि चार महीने का सबसे नीचला स्तर है।
  • इससे पहले जुलाई महीने में यह 5.09 फीसदी के स्तर पर बनी हुई थी।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। थोक महंगाई दर के अगस्त माह के आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। अगस्त में थोक महंगाई दर (WPI) 4.53% रही, जो कि चार महीने का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले जुलाई महीने में यह 5.09 फीसदी के स्तर पर बनी हुई थी। पिछले साल अगस्त की बात करें, तो इस दौरान WPI 3.24 फीसदी के स्तर पर थी। मुख्य रूप से सब्जियों के दामों में आई कमी से थोक महंगाई दर में गिरावट आई है।

बिजली-ईंधन क्षेत्र की बढ़ी महंगाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिजली और ईंधन क्षेत्र की महंगाई दर अगस्त में 17.73 फीसद रही। घरेलू स्तर पर फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी से इसमें तेजी आई है। अगस्त में सब्जियों की थोक महंगाई दर -14.07 फीसद से घटकर -20.18 फीसद रही। वहीं अंडे, मांस की थोक महंगाई दर 0.87 फीसद से घटकर 0.59 फीसद पर आ गई। इसके अलावा दालों की थोक महंगाई दर -17.03 फीसद से बढ़कर -14.26 फीसद रही है।

महंगाई दर में भी देखी गई थी गिरावट
इससे पहले रिटेल महंगाई दर के अगस्त माह के आंकड़ों जारी किए गए थे। खाने-पीने का सामान सस्ता होने के चलते उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर अगस्त 2018 में घटकर 3.69 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई थी। ये 10 महीनों का महंगाई का न्यूनतम स्तर है। जुलाई में ये 4.17 फीसदी थी। वहीं पिछले साल इस समय में ये 3.28 फीसदी थी।

क्या होता है WPI इंडेक्स?
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की गणना थोक बाजार में उत्पादकों और बड़े व्यापारियों द्वारा किये गए भुगतान के आधार पर की जाती है। इसमें उत्पादन के प्रथम चरण में अदा किये गए मूल्यों की गणना की जाती है। भारत में मुद्रा स्फीति की गणना इसी सूचकांक के आधार पर की जाती है।

क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कहा जाता है, जो रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।

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