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श्रद्धांजलि के बाद लोस 18 दिसंबर तक स्थगित, रास में विपक्ष का हंगामा

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 15th, 2017 14:07 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शुक्रवार को संसद के शीतकालीन सत्र का आगाज हो गया। सत्र के पहले से ही इसके हंगामेदार रहने के आसार थे और हुआ भी कुछ ऐसा ही। राज्यसभा में JDU नेता शरद यादव और अली अनवर की सदस्यता खत्म करने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। जिसके बाद दोपहर 12 बजे और फिर 02.30 बजे तक के लिए राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।  विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नीतीश कुमार ने वोट महागठबंधन के नाम पर मांगा और गठबंधन को तोड़कर चले गए। जबकि महागठबंधन की बैठक में ये तय किया गया था कि नीतीश कुमार ही हमारे सीएम चेहरा होंगे। आजाद ने कहा कि बिहार नीतीश कुमार और बीजेपी का अनैतिक गठबंधन बताया। 

'मोदी मांगें माफी'

गुजरात चुनाव के दौरान पीएम मोदी के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मुद्दा भी सदन में उठाया गया। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 'पहली बार है जब एक प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और कूटनीतिज्ञ पर इस तरह की बात की है।  पीएम को संसद में जवाब देना चाहिए।' संसद में इस दौरान कांग्रेस ने हंगामा करते हुए तानाशाही नहीं चलेगी के नारे भी लगाए।

 

विपक्ष सरकार को GST, नोटबंदी, अर्थव्यवस्था और किसानों से जुड़े विषय समेत कई समसामयिक मुद्दों पर घेर सकता है। सरकार शीतकालीन सत्र में 14 नए विधेयक पेश कर सकती है। आज से शुरू हो रहा ये सत्र 5 जनवरी तक चलेगा। पहले दिन लोकसभा में दिवंगतों को श्रद्धांजलि के बाद लोकसभा की कार्यवाही 18 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही 18 दिसंबर को 11 बजे शुरू होगी।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र के सकारात्मक रूप से चलने की उम्मीद जताई। 

 

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विपक्ष की तीखी आलोचना

इस सत्र के दौरान 25 विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसमें से 14 नए विधेयक होंगे। सत्र के दौरान नागरिकता संशोधन विधेयक 2016, मोटरवाहन संशोधन विधेयक 2016 और ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण विधेयक को पारित कराने पर भी जोर दिया जा सकता है। इनमें तीन तलाक के मामले में मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता दिए जाने के अधिकार से जुड़ा विधेयक भी शामिल है। चुनाव के कारण करीब एक महीना देर से बुलाए गए इस सत्र की अवधि थोड़ी कम होगी। पिछले शीतकालीन सत्र के 21 दिवसीय कामकाज के मुकाबले इस सत्र में 14 दिन ही कामकाज होगा। संसद सत्र में विलंब को लेकर सरकार विपक्ष की तीखी आलोचना का सामना कर चुकी है।

 

कांग्रेस के पास कई मुद्दे

कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं है। संसद सत्र के दौरान ही 18 दिसंबर को गुजरात विधानसभा के नतीजे भी आएंगे। कांग्रेस के तेवरों से साफ है कि वो गुजरात चुनाव के नतीजों के बाद भी जय शाह और राफेल सौदे में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है। राहुल गांधी ने गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान लगातार इस बात पर पीएम मोदी को घेरा था कि भ्रष्टाचार पर मोदी मौन क्यों है। अब संसद के सत्र में भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन में हंगामा हो सकता है। वहीं पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर मोदी के लगाए पाकिस्तान के साथ कथित सांठगांठ के आरोपों को भी विपक्ष मुद्दा बना सकता है। विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए और भी कई सारे तीर है। इनमे अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र की बदतर हालत, जीएसटी और प्रवर्तन एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा शामिल है।

 

सत्र से पहले विपक्ष की तैयारी

संसद के इस शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने के लिए गुरुवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस, राकांपा, तृणमूल कांग्रेस, सपा, राजद, नेशनल कांफ्रेंस और वाम दलों सहित विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। संसद में सरकार को घेरने के लिए उठाए जाने वाले मुद्दों पर इस बैठक में चर्चा हुई।

 

 

बीजेपी हर हमले के लिए तैयार

वहीं बीजेपी अपने आप को इस सत्र के लिए पूरी तरह से तैयार बता रही है। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वो चाहती है कि सत्र में सकारात्मक चर्चा हो। संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने एक बयान में बोल चुके है कि सरकार नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है।

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