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गांव की महिलाओं को चूल्हे पर ही भरोसा, साल में 4 ही सिलेंडर उठा रहे लाभार्थी

गांव की महिलाओं को चूल्हे पर ही भरोसा, साल में 4 ही सिलेंडर उठा रहे लाभार्थी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। गांव की महिलाओं को अभी भी चूल्हे पर ही भरोसा होने की जानकारी सामने आई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत नागपुर समेत देश भर में गरीबोें को गैस कनेक्शन बांटे गए। नागपुर जिले में अब तक 76 हजार गैस कनेक्शन दिए गए। साल में सब्सिडी के 12 सिलेंडर मिलते हैं, लेकिन इस योजना के लाभार्थियों ने साल में औसतन 4 ही सिलेंडर लेने की जानकारी सामने आई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 2016 में उत्तर प्रदेश से शुरू हुई। ऐसे गरीब जिनके नाम पर गैस कनेक्शन नहीं है और सरकार द्वारा किए गए सर्वे में उनकी आयु तय सीमा से कम है।  पेट्रोलियम कंपनियो के मार्गदर्शन में हर जिले का कोटा तय किया गया। हालांकि यह कोटा समय-समय पर बढ़ते गया। नागपुर जिले में इस योजना के तहत अब तक लगभग 76 हजार गैस कनेक्शन बांटे गए। शहर में करीब 25 हजार व ग्रामीण क्षेत्र में 51 हजार कनेक्शन दिए गए। ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी महिलाओं का जोर लकड़ियों पर ही भोजन बनाने में है। जिले के रिकार्ड पर नजर डालें तो औसतन 4 ही सिलेंडर उठाए जा रहे हैं। बाकी बचे 8 सिलेंडरों की सब्सिडी का लाभ लाभार्थी नहीं उठा रहे।

बंद नहीं हो सकता कनेक्शन 

ऑयल कंपनियों द्वारा तय नियमों पर गौर करें तो लगातार 12 महीने सिलेंडर नहीं उठाने पर कनेक्शन लॉक किया जाता है। गैस एजेंसी को केवायसी (नो योर कस्टमर) देने पर कनेक्शन अनलॉक (शुरू) हो जाता है। इस कारण अब तक जिले में उज्ज्वला योजना के किसी भी लाभार्थी का कनेक्शन बंद नहीं हो सका। 

जिले में कुल गैस कनेक्शन 

नागपुर शहर व ग्रामीण में लगभग 13 लाख 50 हजार गैस कनेक्शन हैं। एचपी के सर्वाधिक 7 लाख 50 हजार कनेक्शन हैं। भारत पेट्रोलियम के लगभग 2 लाख 80 हजार व इंडियन आइल कारपोरेशन के करीब 3 लाख 20 हजार गैस कनेक्शन हैं। इसमें उज्ज्वला के लाभार्थियों पर नजर डालें तो एचपी के 31 हजार 5 सौ, बीपी के 24 हजार से ज्यादा व आईआेसी के 20 हजार से ज्यादा लाभार्थी हैं। 

बगैर सिलेंडर लिए उठा सकते  हैं सब्सिडी का लाभ 

सरकार की तरफ से हर उपभोक्ता को साल के 12 सब्सिडाइज्ड सिलेंडर मिलते हैं। सब्सिडी छोड़कर सिलेंडर की कीमत लगभग 510 रुपए पड़ती है। बगैर सिलेंडर उठाए भी सब्सिडी का लाभ लिया जा सकता है। मोबाइल से रिफील बुक करने के बाद सब्सिडी बैंक खाते में जमा हो जाती है। घर आए सिलेंडर को लौटाया जा सकता है। उपभोक्ता सुविधानुसार सिलेंडर घर मंगा सकता है।

गैस से ज्यादा लकड़ियाें पर फोकस

उज्ज्वला योजना के समन्वयक कार्यालय से स्पष्ट किया गया कि अभी तक जिले में लगभग 76 हजार सिलेेंडर बांटे गए हैं। साल में 12 सब्सिडाइज्ड सिलेंडर मिलते हैं, लेकिन जिले में और सतन 4 ही सिलेंडर उठाए जा रहे हैं। अधिकांश कनेक्शन ग्रामीण क्षेत्र में हैं आैर लाभार्थी गैस की अपेक्षा लकड़ियों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। गैस सिलेंडर के लिए एकमुश्त मूल्य चुकाना भी सिलेंडर नहीं उठाने का कारण है। ग्रामीण क्षेत्र में आसानी से लकड़ियां उपलब्ध हो जाती है। किसी लाभार्थी का कनेक्शन बंद नहीं किया गया। 
 

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