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विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप : पंघल, मनीष ने पक्के किए पदक

September 19th, 2019 10:42 IST
विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप : पंघल, मनीष ने पक्के किए पदक

डिजिटल डेस्क, एकातेरिनबर्ग (रूस)। एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अमित पंघल (52 किलोग्राम भारवर्ग) और राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता मनीष कौशिक (63 किलोग्राम भारवर्ग) ने यहां जारी एआईबीए पुरुष विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए इस चैम्पियनशिप में पदक पक्के कर लिए हैं।

पंघल और कौशिक से पहले विजेन्दर सिंह, विकास कृष्णन, शिवा थापा और गौरव बिधुड़ी ही इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अब तक सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। यह पहली बार है जब विश्व चैम्पियनशिप के किसी एक संस्करण में एक से अधिक भारतीय ने पदक पक्का किया है। इससे पहले गौरव बिधुड़ी ने 2017 में इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था।

दूसरी सीड पंघल ने बुधवार को क्वार्टर फाइनल में फिलीपींस के कारलो पॉम को 4-1 से करारी मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और विश्व चैम्पियनशिप में अपना पहला पदक पक्का किया।

पंघल ने मैच जीतने के बाद कहा, मेरा मुकाबला अच्छा रहा। मैं पहले भी इससे एशियाई खेल में सेमीफाइनल मैच खेल चुका हूं। मैं वैसे ही रिंग में उतरा था। पहले राउंड में मैंने ज्यादा पंच लगाए। मुझे बोला गया था कि अटैक ज्यादा करना है। शुरुआत धीमी रही, लेकिन मैंने वापसी की और फिर अंत तक अच्छे से खेला। दूसरे और तीसरे राउंड में भी मैने अच्छा प्रदर्शन किया, इसलिए जीत मिली।

सेमीफाइनल में पंघल का सामना कजाकिस्तान के साकेन बिबोसीनोव से होगा। बिबोसीनोव ने अपने क्वार्टर फाइनल मैच में यूरोपियन स्वर्ण पदक विजेता और छठी सीड अमेरिका के आर्थर होवहानिस्यान को शिकस्त देकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की।

अगले मैच पर पंघल ने कहा, अगला मुकबला कजाकिस्तान के मुक्केबाज से है। वह बाएं हाथ का है। उसके खिलाफ कैसे खेलना है, क्या रणनीति बनानी है, इस पर अभी चर्चा करेंगे।

63 किग्रा में मनीष ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ब्राजील के वेडरसन डी ओलीवीरा को 5-0 से हराया। सेमीफाइनल में मनीष का सामना मौजूदा विश्व चैम्पियन क्यूबा के एंडी क्रुज से होगा।

91 किग्रा भार वर्ग में हालांकि भारत को निराशा हाथ लगी जहां संजीत, इक्वाडोर के जूलियो कास्टिलो से 1-4 से हार गए। संजीत 2019 पैन अमेरिकी खेलों के रजत पदक विजेता और दो बार ओलम्पियन कास्टिलो के अनुभव से पार नहीं पा सके।

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