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दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में गणपति की प्रतिष्ठापना, पुणे सजे भव्य पंडाल, विराजे बप्पा

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 14th, 2018 00:00 IST

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दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में गणपति की प्रतिष्ठापना, पुणे सजे भव्य पंडाल, विराजे बप्पा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की आज से शुरुआत हो गई है। दिल्ली में जगह-जगह घरों और पंडालों सहित कोपर्निकस मार्ग स्थित महाराष्ट्र सदन में भी बड़े धूमधाम के साथ गणपति की प्रतिमा की स्थापना की गई है। महाराष्ट्र सदन में सार्वजनिक उत्सव समिति द्वारा आयोजित गणेशोत्सव में निवासी आयुक्त समीर सहाय ने गणपति की पूजा-अर्चना की। इस दौरान महाराष्ट्र सदन के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। दिल्ली तथा एनसीआर में लगभग 39 मराठी गणेश मंडल है। ढोल-नगाडो के गजर में इन मंडलों ने गणेशजी की प्रतिष्ठापना की। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इन मंडलों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है। महाराष्ट्र सदन में वैविध्यपूर्ण संस्कृति का दर्शन कराने वाले कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इनमें लावणी, नाटक, संगीत रजनी, झांज पथक का प्रस्तुतीकरण, किर्तन, भजन संध्या आदि कार्यक्रम रखा गया।

पुणे में में पांचों गणपतियों की प्रतिष्ठापना
इधर पुणे में ढोल, ताशा, नगाड़ा, शहनाई की गूंज में गणपति बाप्पा मोरया के नारे लगे। जहां सम्मान के पांचों गणपति, श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति की प्रतिष्ठापना की गई। सम्मान के पहले अर्थात ग्रामदैवत श्री कसबा गणपति की प्रतिष्ठापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहकार्यवाहक भय्याजी जोशी के हाथों की गई। इससे पहले सुबह सवा दस बजे मंडप से शोभायात्रा निकाली गई। श्रीराम ढोल पथक ने ढोल बजाकर, देवलानकर बंधूओं का नगारा वादन हुआ। सम्मान के दूसरे श्री तांबड़ी जोगेश्वरी गणपति की प्रतिष्ठापना निर्माण व्यवसायी अमोल रायकर ने की। चांदी की पालकी से गणपति की शोभायात्रा निकाली गई। सम्मान के तीसरें गुरूजी तालीम गणपति की स्थापना उद्योगपति आदित्य शर्मा ने की। वहीं सम्मान के चौथे तुलसीबाग गणपति की जन्मेंजय राजेभोसले ने की। इन दोनों गणपतियों की आकर्षक फूलों से सजाए हुए रथों से शोभायात्रा निकाली गई। सम्मान के पांचवें केसरीवाड़ी गणपति की प्रतिष्ठापना रोहित तिलक ने की। उससे पहले गणपति की पारंपारिक चांदी की पालकी से शोभायात्रा निकाली गई।

इसके अलावा प्रसिध्द दगडूशेठ हलवाई गणपति, मंडई गणपति, जिलब्या मारूति, बाबू गेनू मंडल गणपति तथा अन्य जाने माने गणपतियों की भी धूमधाम से प्रतिष्ठापना की गई। प्रसिध्द श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट द्वारा तमिलनाडू तंज स्थित 1200 साल पुराने श्री राजराजेश्वर मंदिर की भव्य प्रतिकृति बनाई गई। आकर्षक मुख्य संभा मंडप तथा गर्भगृह यह इस प्रतिकृति की विशेषताएं है। गर्भगृह में गणेश पुराण में बताएं गए कलंब, सिध्दटेक, थेऊर तथा रांजणगांव गणपतियों संबंधित विविध घटनाएं दिखाई गई हैं। तमिलनाडू में राजे राजराज चोल ने इस मंदिर का निर्माण किया है। इसलिए उक्त मंदिर राजराजेश्वर के नाम से प्रसिध्द है। वैसे मंदिर को तमिल भाषा में बृहदेश्वर मंदिर अथवा बृहदिश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर तेरह मंजिला और 66 मीटर ऊंचा है। 

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