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आरुषि मर्डर केस से लेकर चारा घोटाले तक, 2017 के 5 बड़े फैसले

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 31st, 2017 20:26 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल-2017, हमेशा याद किया जाएगा। क्योंकि इस साल देश की कई कोर्ट ने ऐसे-ऐसे फैसले लिए, जिनका देश की जनता ने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया। कई फैसलों से इन्विस्टिगेशन एजेंसियों पर भी सवाल खड़े हुए, तो किसी को सालों बाद न्याय मिला। कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों के लिए साल 2017 को हमेशा याद किया जाएगा। इस साल वैसे तो कोर्ट ने कई बड़े फैसले लिए, लेकिन हम आपको देश के उन 5 बड़े फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे।


1. तीन तलाक असंवैधानिक : 

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने 3:2 से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का जहां एक तरफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध किया, वहीं मुस्लिम महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक बताया। अगस्त महीने में तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर की प्रेसिडेंशियल वाली 5 जजों की बेंच ने इसे अवैध बताया। 5 में से जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस यूयू ललित ने 'तलाक-ए-बिद्दत' यानी तीन तलाक को अवैध करार दिया। जबकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने इस प्रथा पर 6 महीने तक रोक लगाने की बात करते हुए संसद से इस मसले पर कानून बनाने की बात कही थी। कोर्ट के आदेश पर हाल ही में मोदी सरकार ने लोकसभा में ट्रिपल तलाक पर बिल पेश किया है। इस बिल में ट्रिपल तलाक देने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है। 

2. राम रहीम को 20 साल की सजा : 

अगस्त महीने में ही डेरा सच्चा सौदा के चीफ गुरमीत राम रहीम सिंह को पंचकूला की एक कोर्ट ने 15 साल पुरान साध्वी रेप केस में 20 साल की सजा सुनाई। राम रहीम को दो अलग-अलग मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई गई। साथ ही कोर्ट ने राम रहीम पर 30 लाख का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की इस रकम को दोनों पीड़िताओं को 14-14 लाख रुपए देने के आदेश भी कोर्ट ने दिया। राम रहीम पर बलात्कार का ये केस 2002 का था, जब एक साध्वी ने राम रहीम पर आश्रम में रेप करने का आरोप लगाया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद डेरा सपोटर्स ने हरियाणा और पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में भारी नुकसान पहुंचाया था और अगजनी भी की थी। राम रहीम के बाद उसकी कथित बेटी हनीप्रीत सिंह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा। कई दिनों तक हनीप्रीत फरार रही और बाद में उसने सरेंडर कर दिया। 

3. आरुषि मर्डर केस में तलवार दंपत्ति रिहा : 

इसी साल 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2008 के आरुषि मर्डर केस में तलवार दंपत्ति को रिहा कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मर्डर केस में मुख्य आरोपी आरुषि के माता-पिता राजेश तलवार और नुपुर तलवार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र ने अपने फैसले में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे ये साबित हो कि आरुषि की हत्या राजेश और नुपुर तलवार ने ही की है। इसलिए उन्हें जेल से बाइज्जत बरी किया जाता है। हाईकोर्ट के इस फैसले ने देश की सबसे बड़ी इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी सीबीआई पर सवाल खड़े कर दिए। बता दें कि 2008 में नोएडा के एक फ्लैट में 14 साल की आरुषि की लाश मिली थी और उसके घर में काम करने वाले नौकर हेमराज की लाथ छत पर पड़ी मिली थी। इस मर्डर केस में तलवार दंपत्ति को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हेमराज की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

4. 2G घोटाला हुआ ही नहीं : 

2G स्पेक्ट्रम घोटाले साल 2010 में तब सामने आया, जब कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) विनोद राय ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया। विनोद राय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सरकार ने 2G स्पेक्ट्रम के लाइसेंस बांटने में नियमों की अनदेखी की, जिस वजह से सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सरकार ने नीलामी की बजाय 'पहले आओ, पहले पाओ' की पॉलिसी पर लाइसेंस बांटे, जिससे सरकार को नुकसान हुआ। इस केस में तत्कालीन टेलीकॉम मिनिस्टर ए. राजा और राज्यसभा सांसद कनिमोझी समेत 17 लोगों को आरोपी बनाया गया। इस केस में 21 दिसंबर को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रॉसिक्यूशन कोई भी सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिस वजह से सभी आरोपियों को बरी किया जाता है। स्पेशल कोर्ट के जज ओपी सैनी ने अपने फैसले में कहा कि 'पूरा केस सिर्फ अटकलों और अफवाहों पर ही चला। मैं पिछले 7 सालों से सबूतों का इंतजार कर रहा था, लेकिन सारी उम्मीदें बेकार रहीं। इतने सालों में एक भी काम का सबूत सामने नहीं आया।'

5. चारा घोटाले में लालू को सजा :

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में रांची की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराया है। करीब 950 करोड़ रुपए के इस घोटाले में लालू प्रसाद यादव समेत 22 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 23 दिसंबर को इस घोटाले में कोर्ट ने फैसला देते हुए लालू समेत 15 लोगों को दोषी करार दिया, जबकि 7 लोगों को रिहा कर दिया। चारा घोटाला 1996 में तब सामने आया, जब पशुपालन विभाग की रिपोर्ट में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इसके बाद लालू प्रसाद यादव को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। इस मामले में लालू यादव 2013 में जेल भी गए थे, लेकिन बाद में वो जमानत पर रिहा हो गए। साथ ही उनपर कोर्ट ने 11 सालों तक चुनाव लड़ने पर बैन भी लगा दिया था। अब रांची की कोर्ट 3 जनवरी को लालू की सजा का ऐलान करेगी। 

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