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देश की अर्थव्यवस्था पर बोले रामदेव, कहा- रुपया ही नहीं गिरा, देश की साख भी गिरी

September 14th, 2018 16:15 IST
देश की अर्थव्यवस्था पर बोले रामदेव, कहा- रुपया ही नहीं गिरा, देश की साख भी गिरी

हाईलाइट

  • गिरते रुपये को लेकर बाबा रामदेव ने दिया बड़ा बयान
  • आज रुपये के साथ-साथ देश की साख भी गिरती जा रही है
  • रामदेव की पीएम को सलाह, 2018 महासंग्राम से पहले महंगाई कम करें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में गिरते रुपये को लेकर बाबा रामदेव ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि आज सिर्फ रुपया नहीं गिर रहा है, बल्कि देश की साख भी गिरती जा रही है। देश की अर्थव्यवस्था को लेकर रामदेव ने कहा आज डॉलर के सामने रुपये की कीमत 70 हो गई है। हो सकता है कि कल 80 रुपये देकर हमें एक डॉलर खरीदना पड़े। जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ था, उस समय रुपया और डॉलर एक बराबर था। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में कुछ सोचना चाहिए।  

एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि 'ये सच है कि क्रूड ऑयल की कीमतें थोड़ी सी बढ़ी हैं लेकिन अगर सरकार टैक्स खत्म कर दे तो आज भी 30-40 रुपये में पेट्रोल-डीजल मिल सकता है।' उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी, जनता की आवाज सुनें क्योंकि 2019 का महासंग्राम नजदीक है और महंगाई उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। बाबा ने कहा कि देश को मजबूत करने के लिए देश के हर नागरिक को, चाहे वो किसान हो, जवान हो, बिजनेसमैन हो, जो जहां पर है, वहां दो-दो हाथ अगर काम पर लग जाएंगे तो वे अपनी मेहनत से बिना किसी राजनीतिक दल के एक नया भारत बना लेंगे। तब जाकर रुपये का अवमूल्यन रुकेगा।

विदेशी कंपनियां का मकसद सिर्फ कमाई
विदेशी कंपनियों को लेकर बाबा रामदेव ने कहा, देश में आज विदेशी कंपनियां अपना व्यापार करने के लिए आ रही है। उनका मकसद सिर्फ कमाई करना है। विदेशी कंपनियां भारत में पैसा कमाकर सारा धन अपने देश ले जाती है। क्या किसी कंपनी ने कभी गौशाला, विद्यालय या अस्पताल खोलें।

बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपए में पिछले कई दिनों से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है, रुपए की गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में मंदी के दौर को बताया जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट का एक बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर भी है। इन दो बड़े देशों की बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण वैश्विक स्तर पर लोगों का डॉलर पर भरोसा बढ़ता ही जा रहा है और यही भरोसा रुपए के लिए मुसीबत बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर डॉलर की जमकर खरीदारी का जा रही है। डॉलर पर लोगों का बढ़ता भरोसा ही रुपए की गिरावट के लिए सबसे बड़े कारण बताया जा रहा है। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार माना जा रहा है, क्योंकि मुद्रा को संचालित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की सरकार पर ही होती है। जानकारों की मानें तो अब अगर रुपए को गिरने से बचाना है और उसे मजबूती प्रदान करनी है तो केंद्र सरकार को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। 

रुपये में आई मजबूती 
लगातार रुपये में गिरावट के बाद शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती आई और फॉरेक्स मार्केट में यह 1.005 की मजबूती के साथ खुला। रुपया एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 71.69 पर खुला जिसका मूल्य गुरुवार के कारोबार के आखिर में 72.695 पर रहा था। शुक्रवार को 10 बजे तक रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.879997 यानी 1.210533 प्रतिशत की मजबूती हासिल कर ली थी। वहीं, शुकवार को रिजर्व बैंक ने डॉलर के मुकाबले रुपये का रेफरेंस रेट 72.7549 तय किया। इससे पहले डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को रिकॉर्ड 72.91 के स्तर तक लुढ़कने के बाद संभला और 72.19 रुपये प्रति डॉलर के मूल्य पर बंद हुआ। वहीं मंगलवार को 72.69 पर बंद हुआ था। 


 

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Qi76l
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kuldeep mehta October 10th, 2018 01:19 IST

pay commision lagatar salary badha rahi h, logo ko salary chahiye 80-90 hajar ,baba ram dev apani dawai ki kimate kam kayu nahi karta, dusaro ko nasihayat deni aasan h. mujhe yaad congress ke kary kal 69 rupee hua tha or kuchhdin 70 bhi , log bhul jate h, rupaiya kamjor hua h to export me badhotari bhi hui hogi, ek paksh na soche