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खेल-खेल में रोपे दो पौधे, जो अब अभियान बन गया- कैमोरी के युवकों का प्रसंशीय प्रयास 

खेल-खेल में रोपे दो पौधे, जो अब अभियान बन गया- कैमोरी के युवकों का प्रसंशीय प्रयास 

डिजिटल डेस्क, कटनी। 33 साल पहले खेल-खेल में दो पौधे रोप दिए, पौधे बड़े पेड़ बनने लगे तो लगा और पौधे लगाने चाहिए। पौधे लगाने का यह शौक कब जूनून में बदल गया, पता ही नहीं चला, अब तक 50 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। अब तो वे घर के पास ही एक प्लाट में पौधे तैयार करते हैं, और नि:शुल्क वितरित करते हैं। विजयराघवगढ़ तहसील के ग्राम कैमोरी निवासी मुकेश मिश्र को पौधे रोपने का शौक बचपन से ही था। मुकेश के पिता जे.एल.मिश्रा पुलिस विभाग में  एसआई के पद पर पदस्थ थे। मुकेश के अनुसार जब उनके पिता मेहंदवानी डिंडौरी में पदस्थ थे तक वहां 1986 में थाना परिसर में दो पौधे लगाए थे। तब से पौधे लगाने की जो शुरूआत हुई तो वह अब तक चल रही है। धीरे-धीरे पौधे लगाने का शौक बढ़ता गया। उनका जोर देशी प्रजाति के पौधे रोपित करने पर अधिक रहता है। आसपास से बीज एकत्र कर पौधे तैयार करते हैं और जब वह डेढ़ दो फिट के हो जाते हैं तो लोगों को वितरित कर देते हैं। अभी घर के पास ही लगभग एक हजार वर्ग फिट में पौधों की नर्सरी लगाई है, इससे कम स्थान में अधिक पौधे तैयार हो जाते हैं। इन पौधों को जमीन में तैयार करने के बाद अच्छी बारिश के दौरान पालीथिन के बैग में रखते हैं। मुकेश के अनुसार उनके यहां जो भी आता है उसे 10-20 पौधे निशुल्क दे दिए जाते हैं।

दोस्तों की बनाई समिति

मुकेश मिश्र के अनुसार पौधे तैयार करने में आर्थिक सहयोग के लिए एक समिति बनाई है। जिसमें गांव के लोगों को लोगों को शामिल किया गया है। एक दूसरे से सहयोग लेकर खाद, मिट्टी, पालीथीन और मजदूरों के पारिश्रमिक की व्यवस्था करते हैं। जब रुपये कम पड़ते हैं तो रिटायर एसआई पिता से भी सहयोग लेते हैं। पिछले साल ही पांच हजार से अधिक पौधे वितरित किए थे। इस साल अब तक दो हजार पौधे वितरित किए जा चुके हैं। पिछले दिनों पोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए मुनगा, अमरूद, नीबू, आंवला, आम, बहेड़ा आदि के दो सौ से अधिक पौधे वितरित किए गए थे।
 

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