बुखार के बाद की कमजोरी क्यों होती है खतरनाक? जानें दूर करने के उपाय

बुखार के बाद की कमजोरी क्यों होती है खतरनाक? जानें दूर करने के उपाय
बदलते मौसम के बाद बच्चों से लेकर बड़ों तक को सर्दी-जुकाम, वायरल या मौसमी बुखार जकड़ लेता है। दवाओं के सेवन से बुखार तो कम होता जाता है, लेकिन बुखार के बाद की कमजोरी, जोड़ों में दर्द, भूख न लगना, पैरों में दर्द और नींद न आने की परेशानी से शरीर जूझने लगता है। बुखार के बाद की रिकवरी में भी शरीर का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। बदलते मौसम के बाद बच्चों से लेकर बड़ों तक को सर्दी-जुकाम, वायरल या मौसमी बुखार जकड़ लेता है। दवाओं के सेवन से बुखार तो कम होता जाता है, लेकिन बुखार के बाद की कमजोरी, जोड़ों में दर्द, भूख न लगना, पैरों में दर्द और नींद न आने की परेशानी से शरीर जूझने लगता है। बुखार के बाद की रिकवरी में भी शरीर का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है।

आयुर्वेद कहता है कि बुखार के बाद की कमजोरी को संतुलित करना बहुत जरूरी होता है। बुखार की वजह से शरीर की पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है और शरीर में ऊर्जा और ओज कम होने लगता है। वजन गिरने लगता है और भूख तो लगभग खत्म ही हो जाती है। ऐसे में आयुर्वेद में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिनसे बुखार के बाद की कमजोरी को आसानी से दूर किया जा सकता है।

रोजाना आहार में मूंग दाल खिचड़ी को शामिल करें। आयुर्वेद में मूंग दाल खिचड़ी को “सर्वोत्तम पथ्य” कहा गया है, जिसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। दाल प्रोटीन से भरी होती है, जो शरीर को मजबूत करने में मदद करती है। अगर इसे घी मिलाकर खाया जाए तो स्वाद के साथ पौष्टिक गुण भी बढ़ जाएंगे।

पके हुए केले का सेवन करना भी लाभकारी होता है। केले में ग्लूकोज, पोटैशियम और पेक्टिन होता है, जो मांसपेशी से लेकर हड्डियों को मजबूत करने का काम करता है। केला ऊर्जा का बड़ा स्रोत है। इसके रोजाना सेवन से कमजोरी दूर होगी। गिलोय का रस हर तरह के बुखार में काम आता है। बुखार के बाद भी उसका सेवन किया जा सकता है। इसके लिए गिलोय, अदरक और तुलसी को मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करना लाभदायक होता है। इससे कमजोरी कम होती है, धीरे-धीरे भूख लगने लगती है और ये पचने में भी आसान होता है।

आहार के साथ-साथ आराम की जरूरत भी होती है। बुखार के बाद की कमजोरी को दूर करने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए कम से कम 8-9 घंटे की नींद जरूर लें। इससे शरीर की कोशिकाओं को मरम्मत का समय मिलेगा।

बुखार के समय और बाद में भी शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए नारियल पानी और सादे पानी को उबालने के बाद ही पीएं। नारियल पानी में पोटैशियम, सोडियम और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ दवाओं से होने वाली जलन को भी शांत करते हैं।

गर्मियों के मौसम में सुबह-शाम नारियल पानी ले सकते हैं, जबकि सर्दियों में नारियल पानी का सेवन सीमित मात्रा में करें, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है।

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Created On :   29 Nov 2025 3:26 PM IST

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