असम में बहुविवाह कानून महिलाओं के लिए क्यों जरूरी? सुशांत बोरगोहेन ने बताया कारण

असम में बहुविवाह कानून महिलाओं के लिए क्यों जरूरी? सुशांत बोरगोहेन ने बताया कारण
असम विधानसभा के पांचवें दिन भाजपा विधायक सुशांत बोरगोहेन ने असम में बहुविवाह कानून को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में खास तौर पर बहुविवाह कानून का जिक्र किया, जिसे असम विधानसभा ने हाल ही में पास किया है। उन्होंने बहुविवाह कानून को महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक बताया।

गुवाहाटी, 29 नवंबर (आईएएनएस)। असम विधानसभा के पांचवें दिन भाजपा विधायक सुशांत बोरगोहेन ने असम में बहुविवाह कानून को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में खास तौर पर बहुविवाह कानून का जिक्र किया, जिसे असम विधानसभा ने हाल ही में पास किया है। उन्होंने बहुविवाह कानून को महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक बताया।

सुशांत बोरगोहेन ने कहा कि यह कानून इसलिए भी जरूरी था क्योंकि कई महिलाएं घर के भीतर मानसिक उत्पीड़न का सामना करती हैं, खासकर तब जब पति दूसरी शादी कर लेता है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में महिलाएं टूट जाती हैं और उनका जीवन बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में बहुविवाह कानून महिलाओं को कानूनी और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का काम करेगा।

बोरगोहेन ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की तारीफ करते हुए कहा कि इस तरह का साहसी कदम पूरे देश में चर्चा का विषय है और असम पहला राज्य है जिसने इतनी हिम्मत दिखाते हुए ऐसा कानून लाकर महिलाओं को सम्मान दिलाने का काम किया है। उनका मानना है कि अगर समाज में एक स्वस्थ सामाजिक ढांचा बनाना है और महिलाओं को बराबरी और सुरक्षा देनी है, तो ऐसे कानून बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से इस तरह के कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी, लेकिन इसे आगे बढ़ाने का साहस किसी ने नहीं किया।

इसके बाद सुशांत बोरगोहेन ने छह समुदायों को एसटी दर्जा देने की पुरानी मांग पर भी बात की। उन्होंने बताया कि असम के छह समुदायों (चुटिया, कोच-राजबोंगशी, मोरन, मटक, ताई-अहोम और चाय-जनगोष्ठी) का मामला लंबे समय से लंबित है। ये सभी समुदाय काफी समय से एसटी स्टेटस की मांग कर रहे थे। शनिवार को विधानसभा में इस मुद्दे पर औपचारिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून नहीं है बल्कि प्रतिवेदन है, जिसे यहां से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

बोरगोहेन ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि केंद्र सरकार भी इस मुद्दे की गंभीरता और असम के लिए इसके महत्व को समझेगी। उनका कहना है कि अगर सबकुछ ठीक रहा, तो आने वाले समय में केंद्र सरकार इसे संसद में पेश कर सकती है, जिससे छह समुदायों को एसटी स्टेटस देने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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Created On :   29 Nov 2025 7:20 PM IST

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