मुख्यमंत्री के ‘स्वागत’ कार्यक्रम से पोरबंदर के मोडदर गांव की वर्षों पुरानी सड़क समस्या का हुआ स्थायी निवारण

मुख्यमंत्री के ‘स्वागत’ कार्यक्रम से पोरबंदर के मोडदर गांव की वर्षों पुरानी सड़क समस्या का हुआ स्थायी निवारण
गुजरात में लोकप्रिय बना ‘स्वागत’ ऑनलाइन कार्यक्रम सुदूरवर्ती लोगों की बुनियादी समस्याओं का स्थायी निवारण ला रहा है। इसका उदाहरण है पोरबंदर जिले के मोडदर गांव का किस्सा। पोरबंदर के कुटियाना के पास 1200 लोगों की आबादी वाला छोटा-सा गांव मोडदर आज खुश है और इसका कारण है ‘स्वागत’ ऑनलाइन कार्यक्रम।

गांधीनगर, 30 नवंबर (आईएएनएस)। गुजरात में लोकप्रिय बना ‘स्वागत’ ऑनलाइन कार्यक्रम सुदूरवर्ती लोगों की बुनियादी समस्याओं का स्थायी निवारण ला रहा है। इसका उदाहरण है पोरबंदर जिले के मोडदर गांव का किस्सा। पोरबंदर के कुटियाना के पास 1200 लोगों की आबादी वाला छोटा-सा गांव मोडदर आज खुश है और इसका कारण है ‘स्वागत’ ऑनलाइन कार्यक्रम।

मुख्यमंत्री के ‘स्वागत’ कार्यक्रम में पोरबंदर के मोडदर गांव के लखमणभाई मोडदरा तथा अन्य किसानों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के समक्ष अपने गांव की सड़क समस्या प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणजनों को ध्यान से सुना। गांव की मांग थी कि उन्हें कुतियाना पहुंचने के लिए सड़क तथा पुल बनाकर दिए जाएं।

मुख्यमंत्री को लगा कि ग्रामीणों की समस्या वाजिब है और इससे किसानों, विद्यार्थियों तथा अन्य ग्रामीणों की सुख-सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने तुरंत ही इसके लिए 9 करोड़ रुपए मंजूर किए और पुल का कार्य मंजूर कर तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। अब मोडदर तथा पसवारी गांव के बीच माइनर ब्रिज, क्लवर्ट तथा तीन किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य शुरू होगा। इसके लिए 9 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है।

मुख्यमंत्री के ‘स्वागत’ कार्यक्रम में गांव की समस्या का निवारण होने से ग्रामीणजन भावविभोर बने हैं। लखमणभाई ने कहा, “हम मुख्यमंत्री से मिलकर गांव लौटे, उसके बाद चौथे ही दिन मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से फोन आया कि आपकी समस्या का निराकरण हो गया है। इतना ही नहीं, इस कार्य के लिए 9 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी गई है। हमारे छोटे-से गांव के लिए यह बहुत बड़ी बात है।”

लखमणभाई कहते हैं कि पिछले कई वर्षों से गांव के लोगों की भावना थी कि कुतियाना जाने के लिए सड़क एवं पुल का निर्माण हो। हाल में लगभग चार गांवों को पार करके जाना पड़ता है, जिसका अंतर 20 किलोमीटर है, और फिर नदी के सामने वाले तट पर 100 से अधिक किसानों के खेत हैं। इन खेतों से भी होकर गुजरना पड़ता है। किसान छोटे रास्ते का उपयोग करते हैं, लेकिन जान जोखिम में डालकर।

लखमणभाई कहते हैं कि गांव के लोग पशुधन के साथ नदी में उतरकर खेत में जाते। कभी-कभी वे पतवार का उपयोग करते, जिससे डूब जाने का डर हमेशा रहता। इस समस्या से अब मुक्ति मिलेगी।

यह गांव घेड क्षेत्र का होने के कारण इस गांव में आठ महीने नदी का पानी भरा रहता है और चार महीने ही रास्ता खुला रहता है। गांव के लोगों ने पहली बार यह समस्या जिला स्तरीय ‘स्वागत’ कार्यक्रम में प्रस्तुत की। पोरबंदर कलेक्टर ने अड़चनें दूर कर पुराना रास्ता खुलवाया, लेकिन ग्रामीणों की मांग नदी पर पुल निर्माण की थी। इस संबंध में मुख्यमंत्री के ‘स्वागत’ कार्यक्रम में समस्या प्रस्तुत की गई और समस्या का हल निकला।

मोडदर के रमेशभाई कंरगिया कहते हैं कि यह मार्ग हमारे लिए जीवनडोर समान सिद्ध होगा। विद्यार्थियों को स्कूल नजदीक पड़ेगा, किसानों को खेत, और जब मरीज को तत्काल उपचार की जरूरत होगी, तब उसे अस्पताल जल्दी से पहुंचाया जा सकेगा और उसकी जान बचाई जा सकेगी।

मोडदर के पशुपालक राणाभाई कटारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा किए गए ‘स्वागत’-सत्कार को आज भी याद करते हैं। वे हर्ष व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हमें इस बात का संतोष है कि मुख्यमंत्री ने हमारी समस्या समझी और उसका तत्काल निवारण किया।

मुख्यमंत्री के ‘स्वागत’ कार्यक्रम में मोडदर जैसे अनेक गांवों-शहरों के नागरिकों की समस्या का समाधान हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात में उनके मुख्यमंत्रित्व काल में शुरू हुआ ‘स्वागत’ ऑनलाइन जन शिकायत निवारण कार्यक्रम आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में और तेज गति से आगे बढ़ रहा है तथा ‘नागरिक देवो भवः’ के विचार को वास्तविक रूप दे रहा है।

--आईएएएनएस

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Created On :   30 Nov 2025 5:48 PM IST

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