15 हजार करोड़ के निवेश वादों के साथ आईबीईटी 2026 का समापन, ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश
गौतमबुद्धनगर, 13 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (आईबीईटी) 2026 का गुरुवार को समापन हो गया। एक्सपो के दौरान बायोएनर्जी सेक्टर में करीब 15,000 करोड़ के अनुमानित निवेश वादों और समझौता ज्ञापनों के सामने आने से प्रदेश में ग्रीन एनर्जी और बायोएनर्जी क्षेत्र की संभावनाओं को नई मजबूती मिली है।
आयोजन ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख बायोएनर्जी निवेश केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी और उत्तर प्रदेश न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी की ओर से आयोजित इस एक्सपो में केंद्र और राज्य सरकार के नीति-निर्माताओं, निवेशकों, तकनीकी कंपनियों, उद्यमियों और उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। तीन दिनों तक चले कार्यक्रम में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), इथेनॉल, बायोमास, बायोडीजल, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायो-मोबिलिटी, बायोमटीरियल्स और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल जैसे क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
एक्सपो के अंतिम दिन “किसानों के लिए ग्रीन एनर्जी और आय के अवसर” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने चर्चा की कि कृषि अवशेषों को ऊर्जा में परिवर्तित करके किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत कैसे तैयार किए जा सकते हैं। इस दौरान मजबूत फीडस्टॉक सप्लाई चेन विकसित करने, किसानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बायोएनर्जी आधारित व्यावहारिक कारोबारी मॉडल तैयार करने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों से निकलने वाले पराली और अन्य कृषि अवशेषों को समस्या के बजाय आर्थिक संसाधन में बदला जा सकता है। सीबीजी प्लांटों के विस्तार से एक ओर जहां कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग संभव होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे। एक्सपो के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से बायोएनर्जी सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने और कृषि कचरे को आर्थिक संपत्ति में बदलने में सीबीजी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सीबीजी सेक्टर में अब तक लगभग 3,500 करोड़ का निवेश किया जा चुका है। इससे करीब 25,000 रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में प्रदेश में 70 से 80 और सीबीजी प्लांट स्थापित किए जाने की संभावना है। इससे बायोएनर्जी उत्पादन के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले दो दिनों के सत्रों में भारत के बायोएनर्जी रोडमैप, उत्तर प्रदेश की निवेश क्षमता और कृषि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने में सीबीजी की भूमिका पर उच्चस्तरीय चर्चा हुई।
कार्यक्रम में ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के महानिदेशक संजय गंजू ने कहा कि भारत में बायोएनर्जी का अवसर अब केवल नीतिगत लक्ष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक निवेश और कारोबार का बड़ा क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में परियोजनाओं का विस्तार, फीडस्टॉक सप्लाई चेन को मजबूत करना, किसानों को वैल्यू चेन से जोड़ना और बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने योग्य बिजनेस मॉडल विकसित करना प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।
आईबीईटी 2026 के समापन के साथ आयोजकों ने इसे देश के बायोएनर्जी इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। एक्सपो में सामने आई निवेशकों की रुचि से स्पष्ट है कि भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में बायोएनर्जी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। बायोएनर्जी के विस्तार से कृषि अवशेषों का उपयोग, कचरा प्रबंधन, ग्रामीण रोजगार, किसानों की अतिरिक्त आमदनी और देश की ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ फायदा मिल सकता है। करीब 15,000 करोड़ के संभावित निवेश से उत्तर प्रदेश में नई परियोजनाओं, तकनीकी विकास और रोजगार के अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।
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Created On :   13 Aug 2026 10:58 PM IST












