युवा धर्म संसद में मोहन भागवत बोले-'अहंकार में व्यक्ति समझता है सब कुछ उसके नियंत्रण में, लेकिन ऐसा नहीं'

युवा धर्म संसद में मोहन भागवत बोले-अहंकार में व्यक्ति समझता है सब कुछ उसके नियंत्रण में, लेकिन ऐसा नहीं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने उज्जैन में छठे युवा धर्म संसद में जेन-जी युवाओं को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय जिम्मेदारी और सामाजिक समरसता पर बात की।

उज्जैन, 18 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने उज्जैन में छठे युवा धर्म संसद में जेन-जी युवाओं को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय जिम्मेदारी और सामाजिक समरसता पर बात की।

युवा धर्म संसद में मोहन भागवत ने कहा कि जब उन्होंने 'युवा धर्म संसद' के बारे में सुना तो उन्हें बहुत खुशी हुई, क्योंकि युवा धर्म के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजकल ऐसा सुनने को कम ही मिलता है। जब भी धर्म की चर्चा होती है, लोग कहते हैं कि यह बुढ़ापे की चीज है। गीता और रामायण को रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबें माना जाता है लेकिन ऐसा नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह धर्म कम से कम अस्तित्व की शुरुआत से लेकर अंत तक रहता है और सब कुछ उसी के अनुसार चलता है। आप इसमें विश्वास करें या न करें। कुछ चीजें नियमों से चलती हैं। सूरज है और आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते। अगर आप इसमें विश्वास नहीं करते हैं, तो यह आपकी मर्जी है लेकिन उसका उगना और डूबना निश्चित रूप से जारी रहेगा।

मोहन भागवत ने कहा कि जब व्यक्ति अहंकार से काम करता है, यह मानते हुए कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और सब कुछ उसकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए, तो उसे गलतफहमी हो जाती है कि चीजें उसकी मर्जी से काम करेंगी। हालांकि ऐसा नहीं होता है।

उन्होंने कहा, "मैं आपसे यह नहीं कह रहा हूं कि आप अपने दिमाग को खाली कर दें ताकि मैं उन्हें अपने विचारों से भर सकूं। यह ज्ञान मेरा नहीं है। मैं कह रहा हूं कि अगर हम धर्म को समझना चाहते हैं, तो हमें पहले उन कुछ विचारों से खुद को मुक्त करना होगा जो पहले से ही हमारे दिमाग में बैठे हुए हैं।"

उन्होंने कहा कि एक बात उन्होंने पहले भी कही थी कि धर्म बुढ़ापे के लिए नहीं है। धर्म सृष्टि की शुरुआत से है और सृष्टि के अंत तक रहेगा। सब कुछ उसी के अनुसार चलता है।

मोहन भागवत ने कहा कि वास्तव में धर्म एक ऐसी कल्पना है कि उसका अन्वेषण करने में पूरा जन्म चला जाए, फिर भी समझ में न आए। उन्होंने कहा, "मेरे लिए, मेरा धर्म मेरे जन्म से तय होता है और मेरी मृत्यु तक जारी रहता है, क्योंकि धर्म सभी सुखों का कारण है।"

उन्होंने कहा कि इतना बड़ा महाभारत इतिहास क्यों बताया गया? ताकि लोगों को धर्म समझ में आए। महाभारत में भगवत गीता है, कर्तव्य का उपदेश है, काम का उपदेश है। महाभारत के अंत में पांच श्लोक हैं, उसको भारत सावित्री कहते हैं। वह महाभारत का सार है।

उन्होंने कहा, "जीवन में आप जो भौतिक सुख चाहते हैं, और आपकी इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति धर्म से ही होती है। धर्म का पालन करो, और यह आपको जीवन में सारी खुशियां देगा और मुक्ति की ओर ले जाएगा। किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए डर से, लालच से, या अपनी जान बचाने के लिए भी कभी भी धर्म को मत छोड़ो।"

मोहन भागवत ने धर्म का अर्थ समझाते हुए कहा कि यह कोई ऐसा नियम नहीं है जिसे हम सिर्फ प्रयोगशाला में देखते हैं या जिसके अनुसार कोई मशीन बनती है। धर्म हमारे आचरण में है। उन्होंने कहा कि धर्म का एक अर्थ है जो हम अपने कर्तव्य के रूप में करते हैं, जैसे बेटे का कर्तव्य या राजा का कर्तव्य। इसी तरह, बहना पानी का स्वभाव है और जलना आग का स्वभाव है।

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मराठी मीडियम में पढ़ाई की थी, तो उनकी कक्षा 10 की फिजिक्स की किताब का नाम 'पदार्थ के सामान्य गुण' था। मराठी में इसे 'सामान्य वस्तु धर्म' कहा जाता था। 'जेनरल' का मतलब 'सामान्य', 'मेटर' का मतलब 'वस्तु' और प्रॉपटी' का मतलब 'धर्म' होता है।

मोहन भागवत ने कहा, "धर्म प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक जीव का स्वभाव ध्यान में रखकर उसके कर्तव्य का निर्धारण करता है।" उन्होंने कहा कि धर्म पूरी दुनिया के पालन और प्रगति के लिए सभी को जोड़ता है, सभी को बिना बंटे आगे बढ़ने में मदद करता है और दुनिया के प्रति सभी जीवों और वस्तुओं के कर्तव्यों को उनके स्वभाव को ध्यान में रखते हुए निर्धारित करता है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि आपको इसे पूरी तरह से स्वीकार करने की जरूरत नहीं है। इस पर सोचो। आप वर्तमान में धर्म पर चिंतन कर रहे हैं, तो इस पर चर्चा करो। जब मैं भारत के इतिहास को देखता हूं, तो मुझे यह हर जगह दिखता है। युधिष्ठिर ने अपना पूरा जीवन यह समझने में बिता दिया कि धर्म क्या है। उन्होंने सब कुछ खो दिया लेकिन कभी भी धर्म को नहीं छोड़ा।

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Created On :   18 Sept 2026 1:46 PM IST

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