एआई के मंच को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देना चाहिए बिनय कुमार सिंह

एआई के मंच को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देना चाहिए   बिनय कुमार सिंह
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में भारत एआई में अपना विकास देख रहा है। 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प को मूर्त रूप देने की दिशा में एआई की तरफ से अमूल्य योगदान दिया जा रहा है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में भारत एआई में अपना विकास देख रहा है। 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प को मूर्त रूप देने की दिशा में एआई की तरफ से अमूल्य योगदान दिया जा रहा है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि एआई आगामी दिनों में देश के विकास में अमूल्य योगदान देने जा रहा है। लेकिन, यह अफसोस की बात है कि इस दिशा में कुछ लोग अपनी तरफ से बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस बीच, उन्होंने नक्सलवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इस दिशा में नक्सलवाद की तरफ से बाधा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। नक्सलवाद देश में विकास के पथ पर बाधा पहुंचा रहा है, ताकि विकास से संबंधित कार्यों में संकट पैदा किया जा सके। लेकिन, हम ऐसा होने नहीं देंगे। केंद्र सरकार इस देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित कर चुकी है, जिसे हर हाल में धरातल पर उतारा जाएगा। हम एक सभ्य समाज में नक्सलवाद को हरगिज स्वीकार नहीं कर सकते हैं। यह हमारे लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।

निदेशक ने आगे कहा कि यह हमारे लिए अफसोस की बात है कि नक्सलवाद के इतर भी कई ऐसे लोग हैं, जो विकास के पथ में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका ताजा उदाहरण हमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के रूप में देखने को मिला। ऐसा करके इन लोगों ने वैश्विक मोर्चे पर देश की छवि को अघात पहुंचाने की कोशिश की है, जो कि बिल्कुल गलत है। पहले हमें लगा था कि यह कांग्रेस के कुछ छोटे-मोटे नेताओं की ओर से किया गया कोई प्रपंच होगा। लेकिन, अफसोस की बात है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विरोध प्रदर्शन में संलिप्त सभी लोगों की तुलना ‘बब्बर शेर’ से कर दी। मैं कहता हूं कि अगर राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर माफी मांगी होती, तो आज हमें इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। आज उनकी इज्जत हमारी नजरों में बढ़ चुकी होती। लेकिन, अफसोस उन्होंने ऐसा करने की जहमत नहीं उठाई।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से एआई समिट के दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया, वो गलत है। हर तबके के लोग कांग्रेस के इस कृत्य की आलोचना कर रहे हैं। यहां तक देशभर के शिक्षाविद भी इस तरह के विरोध प्रदर्शन के तरीके की निंदा कर रहे हैं। कल कई शिक्षाविदों ने इस संबंध में संयुक्त बयान जारी किया और कहा कि इस तरह की घटना हमारे देश में नहीं होनी चाहिए थी, यह पूरी तरह से गलत है। इससे हमारी छवि को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी अघात पहुंचा है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने कहा कि एआई के मंच को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देना चाहिए, यह गलत है। एआई आने वाले दिनों में हमारे देश में विकास के पथ को तीव्र करने का काम करेगा। लेकिन, अफसोस की बात है कि कांग्रेस के लोगों ने इसमें भी अपने लिए राजनीतिक संभावना तलाशने की कोशिश की है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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Created On :   24 Feb 2026 6:42 PM IST

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