अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली हाईकोर्ट से तीन दिन की कस्टडी पैरोल, अंतरिम जमानत से इनकार

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली हाईकोर्ट से तीन दिन की कस्टडी पैरोल, अंतरिम जमानत से इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को कैंसर पीड़ित पत्नी से मिलने के लिए तीन दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर कर ली है। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लागू कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को कैंसर पीड़ित पत्नी से मिलने के लिए तीन दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर कर ली है। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लागू कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने सिद्दीकी को 21, 23 और 25 जुलाई को निर्धारित अवधि के लिए कस्टडी पैरोल पर अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति दी है।

जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपनी पत्नी उस्मा अख्तर की देखभाल के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग की थी। उनकी पत्नी स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं। जवाद अहमद सिद्दीकी ने अदालत से कहा था कि इस कठिन समय में उनकी पत्नी को उनके सहयोग और देखभाल की आवश्यकता है।

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सिद्दीकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने पक्ष रखा, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन पेश हुए।

ईडी ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि मामला गंभीर आर्थिक अपराधों से जुड़ा है और याचिकाकर्ता को राहत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।

इससे पहले साकेत स्थित विशेष अदालत ने भी सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने 9 जून के आदेश में कहा था कि उनकी पत्नी स्टेज-4 कैंसर से पीड़ित हैं, लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड में ऐसी कोई आपात या जीवन-रक्षक स्थिति सामने नहीं आई है, जिसके लिए अंतरिम जमानत जरूरी हो।

अदालत ने यह भी कहा था कि उपलब्ध चिकित्सा दस्तावेजों में बीमारी को "स्थिर" बताया गया है और उपचार का सकारात्मक असर दिख रहा है।

ईडी के अनुसार, यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इन एफआईआर में अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने एनएएसी की समाप्त हो चुकी मान्यता को वैध बताकर पेश किया और ऐसी यूजीसी मान्यता का दावा किया जो वास्तविक रूप से मौजूद नहीं थी। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज पर नेशनल मेडिकल कमीशन से मंजूरी प्राप्त करने के लिए अनियमितताएं करने का भी आरोप है।

ईडी का दावा है कि वर्ष 2016-17 से 2024-25 के बीच लगभग 493.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। जांच में आरोप लगाया गया है कि इस धन को सिद्दीकी और उनके परिवार से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।

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Created On :   16 July 2026 12:11 AM IST

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