भारत को आर्थिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर मजबूत करेगा ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट सेवानिवृत्त मेजर जनरल रावत
देहरादून, 1 मई (आईएएनएस)। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर रणनीतिक हलकों में चर्चा लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत ने शनिवार को आईएएनएस से विशेष बातचीत में इस परियोजना के सामरिक और आर्थिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को समझने के लिए सबसे पहले इसकी भौगोलिक स्थिति को समझना जरूरी है।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत ने बताया, "ग्रेट निकोबार द्वीप भारत की द्वीप शृंखला का सबसे दक्षिणी हिस्सा है और यह मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है। यह दूरी लगभग 150 किलोमीटर है, जबकि इंडोनेशिया इससे भी करीब है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण भारत को मुख्य भूमि से आगे समुद्री पहुंच मिलती है, जो लगभग 1400 से 1500 किलोमीटर तक विस्तारित होती है। इससे भारत को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में एक मजबूत रणनीतिक बढ़त मिलती है।"
उन्होंने वैश्विक व्यापार के संदर्भ में मलक्का जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "दुनिया का करीब 30 से 40 प्रतिशत व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के लिए एक 'न डूबने वाले सैन्य अड्डे' की तरह काम कर सकता है, जिससे समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना और क्षेत्र में अन्य शक्तियों, विशेष रूप से चीन की मौजूदगी का संतुलन करना संभव होगा।"
रावत ने कहा, "जिस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक भू-राजनीति में अहम भूमिका निभाता है, उसी तरह मलक्का जलडमरूमध्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन समुद्री ‘चोकपॉइंट्स’ पर नियंत्रण या उनके आसपास मजबूत उपस्थिति बनाए रखना किसी भी देश के लिए रणनीतिक बढ़त का बड़ा स्रोत होता है।"
ऑपरेशनल दृष्टिकोण से प्रोजेक्ट की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा, "ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा। इससे समुद्री मार्गों पर होने वाली गतिविधियों को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर त्वरित प्रतिक्रिया देना संभव होगा। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने यह साबित किया है कि संकरे समुद्री रास्तों का सामरिक उपयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।"
लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से इस प्रोजेक्ट को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए रावत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा, "एक जिम्मेदार नागरिक और सैन्य अधिकारी के तौर पर हमें विकास और पर्यावरण, दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलना होगा। भारत तेजी से आर्थिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जरूरी हैं, लेकिन पर्यावरणीय चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।"
जी. एस. रावत ने कहा, "आज की दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितताओं को देखते हुए ग्रेट निकोबार जैसे प्रोजेक्ट्स को केवल विकास के नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।" उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट भारत को आर्थिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर मजबूत करेगा।
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Created On :   1 May 2026 10:44 PM IST












