भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने दी श्रद्धांजलि

भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने दी श्रद्धांजलि
भारत के सबसे महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि शुक्रवार को है। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने भारत रत्न से सम्मानित शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को याद कर भावभिनी श्रद्धांजलि दी।

मुंबई, 21 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के सबसे महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि शुक्रवार को है। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने भारत रत्न से सम्मानित शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को याद कर भावभिनी श्रद्धांजलि दी।

अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई बजाते हुए एक तस्वीर पोस्ट की। अभिनेता ने लिखा, "बिस्मिल्लाह खान जी को उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी उनको याद करते हैं।" जैकी अक्सर अपने सोशल मीडिया के जरिए सिनेमा, संगीत और दूसरे क्षेत्रों की महान हस्तियों को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर याद करते रहते हैं।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की बात करें तो, वह उस्ताद भारतीय क्लासिकल संगीत में सबसे मशहूर नामों में से एक हैं। 21 मार्च, 1916 को बिहार के डुमरांव में जन्मे, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान संगीतकारों के परिवार से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने अपने मामा अली बक्स 'विलायतु' से ट्रेनिंग ली थी, जो वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर से जुड़े एक शहनाई वादक थे।

बिस्मिल्लाह खान ने शहनाई को शुभ मौकों और पारंपरिक समारोहों से जोड़कर कॉन्सर्ट स्टेज तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई। उनके करियर का सबसे अहम पल 15 अगस्त, 1947 को आया, जब उन्होंने भारत की आजादी के जश्न के मौके पर दिल्ली के लाल किले से शहनाई बजाई थी।

उन्होंने भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर भी परफॉर्म किया और संगीत में योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले, जिनमें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, तानसेन अवॉर्ड और पद्म विभूषण शामिल हैं। 2001 में, उन्हें भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

बिस्मिल्लाह खान का भारतीय सिनेमा से भी कनेक्शन था। वह सत्यजीत रे की मशहूर फिल्म 'जलसाघर' में दिखे और 1959 की फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' में शहनाई बजाई।

उस्ताद का 21 अगस्त, 2006 को 90 साल की उम्र में वाराणसी में कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। उनकी मौत के बाद सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। उन्हें वाराणसी में उनकी शहनाई के साथ दफनाया गया और भारतीय सेना ने उन्हें 21 तोपों की सलामी दी।

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Created On :   21 Aug 2026 1:16 PM IST

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