भविष्य के युद्धों में चेतावनी का समय बहुत कम हो सकता है राजनाथ सिंह

भविष्य के युद्धों में चेतावनी का समय बहुत कम हो सकता है  राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के रणनीतिक विश्लेषण से हमें यह संकेत मिला है कि भविष्य के युद्धों में चेतावनी मिलने का समय बहुत कम हो सकता है। बिना किसी पूर्व चेतावनी के उत्पन्न होने वाली परिस्थितियां और युद्ध में तकनीक का बढ़ता उपयोग हमारी तैयारियों की गंभीर परीक्षा ले सकते हैं। ऐसे युद्ध हमारी रसद व्यवस्था और आपूर्ति तंत्र की क्षमता को भी परख सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रखने के लिए हमें अपनी रसद व्यवस्था को भी मजबूत बनाना होगा।

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के रणनीतिक विश्लेषण से हमें यह संकेत मिला है कि भविष्य के युद्धों में चेतावनी मिलने का समय बहुत कम हो सकता है। बिना किसी पूर्व चेतावनी के उत्पन्न होने वाली परिस्थितियां और युद्ध में तकनीक का बढ़ता उपयोग हमारी तैयारियों की गंभीर परीक्षा ले सकते हैं। ऐसे युद्ध हमारी रसद व्यवस्था और आपूर्ति तंत्र की क्षमता को भी परख सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रखने के लिए हमें अपनी रसद व्यवस्था को भी मजबूत बनाना होगा।

इसके चलते सोमवार को भारतीय सेना में 'भारत राईस' की शुरुआत की गई। इसके लिए भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम के बीच समझौता हुआ। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'भारत राईस' की शुरुआत केवल चावल से जुड़ी पहल नहीं है। यह उस विश्वास का प्रतीक है, जो किसान के खेत से शुरू होकर सैनिक की भोजन की थाली तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि यह उस सामूहिक संकल्प को दर्शाता है, जिसमें किसान का परिश्रम सैनिक की शक्ति बनता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जब हम चैन की नींद सोते हैं, तब हमारे सैनिक यह सुनिश्चित कर रहे होते हैं कि देश की सीमाओं से कोई खतरा हमारे घरों तक न पहुंचे। इसलिए सैनिकों का कल्याण हमारे लिए कोई गौण विषय नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है।

रक्षामंत्री ने कहा, ''जब देश की सीमा पर हमारे जवान खड़े हों, तो उनके मन में यह विश्वास हमेशा रहना चाहिए कि पूरा देश उनके पीछे है। हमारे सैनिकों का मनोबल हमारी प्राथमिकता है। यह प्रतिबद्धता केवल सरकार की नहीं है। यह किसानों की भी है, सहकारी क्षेत्र की भी है, नागरिक प्रशासन की भी है और सबसे बढ़कर पूरे राष्ट्र की प्रतिबद्धता है।''

इस समझौते के अंतर्गत, आपातकालीन सैन्य परिस्थितियों में भारतीय सेना भारतीय खाद्य निगम के निर्धारित भंडारण केंद्रों और संसाधनों का उपयोग कर सकेगी। यह दोहरे उपयोग की व्यवस्था होगी। यानी देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे और क्षमताओं का इस्तेमाल केवल एक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि नागरिक और सैन्य दोनों तरह की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ''मुझे आशा है कि भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम के बीच यह सहयोग भविष्य में और भी नए आयाम स्थापित करेगा। हम अपनी व्यवस्थाओं को अधिक आधुनिक, अधिक सक्षम और अधिक भरोसेमंद बनाएंगे, ताकि हमारे जवान हर परिस्थिति में पूरी तत्परता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।''

उन्होंने कहा कि एक ओर हमारे किसान हैं, जो खेतों में अन्न उगाते हैं, तो दूसरी ओर हमारे जवान हैं, जो उसी धरती की रक्षा करते हैं। किसान देश का पेट भरते हैं और सैनिक देश की सीमाओं को सुरक्षित रखते हैं। दोनों के कार्यक्षेत्र अलग हैं, लेकिन उद्देश्य राष्ट्र को मजबूत बनाना ही है। आज 'भारत राईस' की शुरुआत किसानों और जवानों के बीच के संबंध को दर्शाती है और 'जय जवान, जय किसान' की भावना को साकार करती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'भारत राईस' के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाला चावल तय मानकों के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही पैकेटों की बनावट और उपयोग में आसानी का भी ध्यान रखा जा रहा है। यह बदलाव भले ही छोटा दिखाई दे, लेकिन दुर्गम क्षेत्रों में राशन पहुंचाने वाले जवानों के लिए इससे काम करना काफी आसान होगा। इस समझौते के तहत, आपातकालीन सैन्य परिस्थितियों में भारतीय सेना भारतीय खाद्य निगम के निर्धारित भंडारण केंद्रों और संसाधनों का उपयोग कर सकेगी। यह दोहरे उपयोग की व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत देश के बुनियादी ढांचे और संसाधनों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य, दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकेगा।

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Created On :   12 Oct 2026 12:56 PM IST

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