भवानीपुर में राजनीतिक पारा चढ़ा, ममता और शुभेंदु के बीच जोरदार मुकाबले की तैयारी

भवानीपुर में राजनीतिक पारा चढ़ा, ममता और शुभेंदु के बीच जोरदार मुकाबले की तैयारी
पश्चिम बंगाल में अप्रैल के आखिर में होने वाला विधानसभा चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं रह गया है। यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच पहचान और ताकत की सीधी लड़ाई बन गया है। इस लड़ाई का केंद्र है भवानीपुर विधानसभा सीट।

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में अप्रैल के आखिर में होने वाला विधानसभा चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं रह गया है। यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच पहचान और ताकत की सीधी लड़ाई बन गया है। इस लड़ाई का केंद्र है भवानीपुर विधानसभा सीट।

साल 2021 में यह राजनीति तब और व्यक्तिगत हो गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पुराने सहयोगी सुवेंदु अधिकारी को उनके गढ़ नंदीग्राम में जाकर चुनौती दी।

तृणमूल कांग्रेस के कई समर्थकों ने इसे सुवेंदु अधिकारी को पार्टी छोड़ने के लिए सबक सिखाने की कोशिश बताया था। लेकिन यह फैसला ममता बनर्जी के लिए सही साबित नहीं हुआ।

नंदीग्राम में ममता बनर्जी लगभग 2,000 वोटों से हार गईं, हालांकि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पूरे राज्य में बड़ी जीत हासिल की और 294 में से 215 सीटें जीतीं।

ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक समझ पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने यह नजरअंदाज कर दिया कि 2007 के नंदीग्राम आंदोलन को खड़ा करने और मजबूत बनाने में सुवेंदु अधिकारी की अहम भूमिका थी।

यही आंदोलन 2011 में लेफ्ट फ्रंट सरकार के सत्ता से बाहर होने का एक बड़ा कारण बना था। अधिकारी परिवार का पूर्वी मेदिनीपुर जिले में लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है। उनके पिता, शिशिर अधिकारी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद के रूप में कांथी लोकसभा सीट से लगातार तीन बार (2009, 2014 और 2019) चुने गए।

बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्होंने 2024 में चुनाव नहीं लड़ा। इसके बाद यह सीट उनके बेटे सौमेंदु अधिकारी को मिली, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।

संयोग से, इस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से चार पर 2021 के राज्य चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल की थी।

सुवेंदु अधिकारी के अलग होने के बाद इस परिवार ने तृणमूल कांग्रेस से अपने सभी संबंध तोड़ लिए। इसी बीच, तमलुक लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय ने जीत हासिल की।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी के लिए यह उनके 'पारा' (इलाके) भवानीपुर से लड़ा गया एक उपचुनाव था, जिसने उन्हें लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया।

अब उनके पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी ने यह चुनावी लड़ाई सीधे उनके गढ़ तक पहुंचा दी है। हालांकि, सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से भी अपना नामांकन दाखिल किया है। इस तरह, उन्होंने विधानसभा में प्रवेश के अपने विकल्प खुले रखे हैं। उनके इस आत्मविश्वास ने तृणमूल कांग्रेस के खेमे में कुछ चिंता जरूर बढ़ा दी है।

तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भवानीपुर में डेरा डाले हुए हैं और अपने नेता के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं, जबकि ममता बनर्जी खुद पूरे राज्य में चुनावी दौरे कर रही हैं। सुवेंदु अधिकारी को अपनी जीत को लेकर कई वजहों से भरोसा है। सबसे पहले, उनका कहना है कि चुनाव आयोग अगर वोटर लिस्ट का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) करता है, तो तृणमूल कांग्रेस के कई वोट हट सकते हैं। उनका आरोप है कि इन वोटरों में कुछ 'फर्जी' हैं या 'अवैध प्रवासी' हैं।

इसके अलावा, वह ‘सत्ता-विरोधी लहर’ (एंटी-इनकंबेंसी) पर भी भरोसा कर रहे हैं। उनके अनुसार, राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं—जैसे आरजी कर अस्पताल में एक मेडिकल इंटर्न के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना, राजनीतिक हिंसा, और तृणमूल नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की जांच ने लोगों में नाराजगी बढ़ाई है।

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Created On :   31 March 2026 7:03 PM IST

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